ओलंपिक

ओलंपिक कांस्य भूल चुके अमन सहरावत, अब लक्ष्य सिर्फ स्वर्ण पदक

ओलंपिक कांस्य विजेता अमन सहरावत अब स्वर्ण पदक को लक्ष्य बना चुके हैं। कठिन बचपन और संघर्षों के बाद मिली सफलता ने उन्हें नई पहचान दी है। अब वे आत्मविश्वास के साथ गोल्ड के मिशन पर निकल चुके हैं।

पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर अमन सहरावत ने न केवल देश का नाम रोशन किया बल्कि अपनी निजी जिंदगी में भी बड़ी कामयाबी हासिल की. हालांकि अमन का कहना है कि उन्होंने इस उपलब्धि को पीछे छोड़ दिया है क्योंकि वे अब सिर्फ स्वर्ण पदक जीतने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. “अगर अतीत में जीते रहे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे,” उन्होंने कहा.

अनाथ बचपन और संघर्षों भरी शुरुआत
हरियाणा के बिरोहर गांव में जन्मे अमन सहरावत की जिंदगी शुरू से ही आसान नहीं रही. छोटी उम्र में माता-पिता को खोने के बाद उनके चाचा ने उन्हें सहारा दिया, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों ने हमेशा उन्हें मानसिक रूप से दबाव में रखा. ओलंपिक की सफलता ने उन्हें न सिर्फ नाम, बल्कि आर्थिक स्थिरता भी दी.

“अब लोग मुझे पहचानते हैं, सम्मान देते हैं”
विश्व चैंपियनशिप ट्रायल में 57 किग्रा वर्ग में जीत के बाद अमन ने कहा, “पहले मेरे प्रदर्शन पर कोई ध्यान नहीं देता था, लेकिन अब लोग मुझसे उम्मीदें रखते हैं. मैं पहले सिर्फ एक पहलवान था, अब देश का पदक विजेता हूं. ये मेरे लिए गर्व की बात है, लेकिन रुकना नहीं है.”

पदक ने बदली आर्थिक स्थिति, मिली राहत
ओलंपिक के बाद अमन की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया. उन्होंने बताया, “अब मैं अपनी बहन की पढ़ाई और शादी को लेकर निश्चिंत हूं. पहले खर्च और जिम्मेदारियों का दबाव था, लेकिन अब मैं पूरी तरह अभ्यास पर ध्यान दे सकता हूं.”

चोट और आत्मसंशय से भी गुजरे अमन
ओलंपिक के बाद अमन ने सिर्फ दो टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया. वे सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में नहीं खेल पाए. उन्होंने बताया कि चोट और हार का डर उनके प्रदर्शन में रुकावट बना. कोचों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अब वे एक अलग स्तर पर हैं और उन्हें उसी तरह से खुद को तैयार करना होगा.

अब मिशन गोल्ड शुरू
अमन का अगला लक्ष्य स्पष्ट है – स्वर्ण पदक. वे कहते हैं, “मैं कांस्य से संतुष्ट नहीं हूं. अब मुझे दुनिया को दिखाना है कि मैं स्वर्ण जीतने के लायक हूं.”

W88 Sports News