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‘क्या मुझे हमेशा चुप रहना होगा?’ – लवलीना का दर्दनाक सवाल, ट्रेनिंग की कमी पर फूटा गुस्सा

ओलंपियन लवलीना बोरगोहेन ने ट्रेनिंग की कमी और पेरिस ओलंपिक से पहले सीमित अवसर मिलने पर निराशा जताई। तुर्की की बुसरा इस्लिदार से हार के बाद उन्होंने बेहतर ट्रेनिंग और सहयोग की मांग उठाई।

तोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने एक साल से अधिक समय बाद वापसी करते हुए विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, लेकिन उनकी वापसी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. 75 किग्रा वर्ग के राउंड ऑफ 16 में उन्हें तुर्की की बुसरा इस्लिदार के हाथों 0-5 से हार झेलनी पड़ी. लवलीना पूरे मुकाबले में अपनी लय से बाहर नजर आईं.

सोशल मीडिया पर छलका दर्द
मुकाबले के बाद लवलीना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी भावनाएं साझा कीं. उन्होंने लिखा, “एक साल बाद मैंने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता खेली और पहले ही मुकाबले में हार गई… यह बहुत पीड़ादायक है. लेकिन सभी जानते हैं कि मैं किसी और चीज के लिए नहीं लड़ती, सिर्फ अपनी ट्रेनिंग के लिए.”

पेरिस ओलंपिक से पहले मिली निराशा
27 वर्षीय लवलीना ने पेरिस ओलंपिक की तैयारियों के दौरान मिले सीमित अनुभव पर भी निराशा जताई. उन्होंने कहा कि टोक्यो खेलों से पहले उन्हें बेहतर अंतरराष्ट्रीय शिविर और स्परिंग पार्टनर मिले थे, लेकिन पेरिस से पहले उन्हें बहुत कम मौके दिए गए. उन्होंने सवाल किया कि “अच्छे जोड़ीदार के बिना मैं खुद को कैसे बेहतर बना सकती हूं?”

मानसिक और शारीरिक चुनौती
लवलीना ने साफ कहा कि खेल में मानसिक शक्ति उतनी ही अहम है जितनी शारीरिक क्षमता. उन्होंने खुलासा किया कि पेरिस ओलंपिक में भी वह लगभग अकेली थीं और बार-बार खुद को साबित करना पड़ा.

निजी कोच और यूरोप ट्रेनिंग की मांग ठुकराई गई
लवलीना ने बताया कि इस साल उन्होंने अपने निजी कोच को राष्ट्रीय शिविर में शामिल करने और यूरोप में ट्रेनिंग का अनुरोध किया था, लेकिन दोनों अनुरोध खारिज कर दिए गए. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मौजूदा कोचिंग स्टाफ को दोष नहीं दे रहीं, लेकिन बेहतर ट्रेनिंग की मांग करना उनका अधिकार है.

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