
11 साल में खेलों का खेल बदलने वाला मास्टरप्लान – मोदी का वो दांव जिसने भारत को दिलाए 15 ओलंपिक मेडल!
पिछले 11 सालों में पीएम मोदी की खेल नीतियों ने भारत का खेल परिदृश्य बदल दिया। TOPS और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं ने ग्रामीण टैलेंट को मंच दिया और देश को 15 ओलंपिक मेडल दिलाकर वैश्विक पहचान दिलाई।
पिछले तीन ओलंपिक खेलों में भारत ने 15 मेडल जीते – ये संख्या अपने आप में दिखाती है कि भारतीय खेलों की तस्वीर कितनी बदल गई है. इसके पीछे सिर्फ खिलाड़ियों की मेहनत नहीं, बल्कि सरकार की वह विजन है जिसने उन्हें सही दिशा और संसाधन दिए.
TOPS – चैंपियंस बनाने की फैक्ट्री
मई 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के दो महीने बाद ही जुलाई 2014 में टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) की शुरुआत हुई. इसके तहत ओलंपिक मेडल की क्षमता वाले खिलाड़ियों को हर महीने 50 हजार रुपये का स्टाइपेंड और विदेशी टूर्नामेंट्स के लिए पूरी फंडिंग दी जाती है. यही वजह है कि नीरज चोपड़ा, पीवी सिंधु और बजरंग पूनिया जैसे स्टार्स देश के लिए मेडल ला सके.
खेलो इंडिया – गांव-गांव से खोजे सितारे
2017 में शुरू हुआ खेलो इंडिया गेम्स ने देश के कोने-कोने से टैलेंट को खोज निकाला. खेलो इंडिया यूथ, यूनिवर्सिटी, विंटर, पैरा और बीच गेम्स के जरिए अब तक 19 बार ये आयोजन हो चुका है. इसका उद्देश्य है कि कोई भी टैलेंट सिर्फ इसलिए पीछे न रह जाए क्योंकि उसके पास सही प्लेटफॉर्म नहीं था.
भविष्य के चैंपियंस की नर्सरी
देशभर में 1057 खेलो इंडिया सेंटर और 34 स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए गए हैं. यहां पूर्व चैंपियंस खुद खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देते हैं और खेल विज्ञान की मदद से उनकी फिटनेस और स्किल्स को नई ऊंचाई पर ले जाते हैं.
टैलेंट आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम – सही खिलाड़ी की सही ट्रेनिंग
नेशनल चैंपियनशिप से चुनकर अब तक 2808 एथलीट्स को इस प्रोग्राम में शामिल किया गया है. हर एथलीट पर सालाना 6.28 लाख रुपये खर्च कर उन्हें वर्ल्ड-क्लास ट्रेनिंग दी जा रही है.
नतीजा – ग्लोबल स्पोर्ट्स में भारत का उदय
इन सभी पहलों का असर अब दुनिया देख रही है. चाहे ओलंपिक हो, एशियन गेम्स या कॉमनवेल्थ – भारत का नाम अब मेडल टेबल में लगातार ऊपर जा रहा है. पीएम मोदी का विजन साफ है – खेल सिर्फ जीतने के लिए नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को मजबूत और प्रेरित करने के लिए हैं.
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