
आईएसएल के भविष्य पर संकट, मुंबई सिटी एफसी से CFG का बाहर होना, भारतीय फुटबॉल के लिए बड़ा चेतावनी संकेत
सिटी फुटबॉल ग्रुप ने मुंबई सिटी एफसी से अपनी हिस्सेदारी बेच दी है। आईएसएल के भविष्य पर अनिश्चितता, AIFF–FSDL विवाद और लीग ठप होने की आशंका ने भारतीय फुटबॉल के प्रोफेशनल ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का भविष्य खुद सवालों के घेरे में है। मुंबई सिटी एफसी ने अपने बयान में पुष्टि की कि सिटी फुटबॉल ग्रुप (CFG) ने व्यापक व्यावसायिक समीक्षा के बाद क्लब में अपनी हिस्सेदारी बेच दी है। साल 2019 में CFG के जुड़ने के बाद मुंबई सिटी एफसी ने शानदार प्रदर्शन किया और खुद को आईएसएल की सबसे मजबूत टीमों में शामिल किया। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए CFG ने भारत में अपने निवेश को आगे न बढ़ाने का फैसला लिया है।
CFG का योगदान और क्लब की सफलता
CFG के कार्यकाल में मुंबई सिटी एफसी ने दो बार आईएसएल लीग विजेता शील्ड और दो बार आईएसएल कप अपने नाम किए। सिर्फ ट्रॉफी ही नहीं, बल्कि क्लब के फुटबॉल ऑपरेशंस, ट्रेनिंग सिस्टम और प्रोफेशनल मैनेजमेंट को भी नई दिशा मिली। CFG ने भारतीय फुटबॉल के विकास में भी अहम योगदान दिया और मुंबई सिटी को एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित किया। ऐसे में CFG का बाहर जाना सिर्फ एक क्लब का मामला नहीं, बल्कि पूरे भारतीय फुटबॉल सिस्टम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
आईएसएल की अनिश्चितता बनी वजह
CFG ने साफ किया कि आईएसएल के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता ही इस फैसले की सबसे बड़ी वजह है। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) और फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (FSDL) के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट 8 दिसंबर को खत्म हो चुका है। 2025-26 सीजन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। सितंबर में नए कमर्शियल पार्टनर के लिए टेंडर निकाले गए, लेकिन कोई भी बोली लगाने आगे नहीं आया। इस वजह से कई क्लबों ने अपनी फर्स्ट टीम का संचालन रोक दिया है और खिलाड़ी खुले तौर पर लीग दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
भारतीय फुटबॉल पर मंडराता बड़ा खतरा
इन हालातों के चलते भारत लगभग तीन दशकों में पहली बार टॉप लेवल पुरुष फुटबॉल लीग के बिना रहने की स्थिति में पहुंच सकता है। इससे भी बड़ा खतरा यह है कि भारत एशियाई प्रतियोगिताओं में अपना प्रतिनिधित्व खो सकता है। नियमों के मुताबिक, क्लबों को क्वालिफाई करने के लिए एक सीजन में कम से कम 27 मैच खेलने होते हैं। अगर आईएसएल नहीं हुई, तो यह संभव नहीं होगा। CFG का बाहर निकलना इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक अस्थिरता और व्यावसायिक स्पष्टता की कमी भारतीय फुटबॉल के प्रोफेशनल ढांचे को गंभीर खतरे में डाल रही है।
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