ओलंपिक

23 गोल्ड के बाद भी संतुष्टि नहीं, माइकल फेल्प्स ने बताया क्यों उनके लिए सिल्वर और ब्रॉन्ज सिर्फ हार की याद हैं ?

23 ओलंपिक गोल्ड जीतने वाले माइकल फेल्प्स ने खुलासा किया कि उनके लिए सिल्वर और ब्रॉन्ज सिर्फ हार की याद हैं। उनका मानना है कि दूसरा या तीसरा स्थान इस बात का संकेत है कि कोई और आपसे बेहतर था।

ओलंपिक इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ी माइकल फेल्प्स ने अपनी जीत की सोच को लेकर चौंकाने वाली बात कही है। 23 ओलंपिक गोल्ड जीतने वाले फेल्प्स का कहना है कि उनके लिए सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल की कोई खास अहमियत नहीं है। एक पॉडकास्ट में खुलकर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दूसरा या तीसरा स्थान उनके लिए हार जैसा है। उनके मुताबिक सिल्वर का मतलब है कि कोई और आपसे बेहतर था और ब्रॉन्ज भी उसी हार की याद दिलाता है। फेल्प्स ने साफ कहा कि उन्होंने कभी खुद को दूसरे नंबर के लिए तैयार नहीं किया, उनकी पूरी सोच सिर्फ जीत और गोल्ड पर टिकी रही।

ओलंपिक इतिहास का सबसे बड़ा नाम
बाल्टीमोर में जन्मे माइकल फेल्प्स का करियर किसी सपने से कम नहीं रहा। उन्होंने सिडनी 2000 से लेकर रियो 2016 तक पांच ओलंपिक में हिस्सा लिया और कुल 28 मेडल अपने नाम किए। इनमें 23 गोल्ड, 3 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल हैं। उनका सबसे यादगार प्रदर्शन बीजिंग ओलंपिक 2008 में रहा, जहां उन्होंने एक ही ओलंपिक में 8 गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। इससे पहले एथेंस 2004 में 6 गोल्ड, लंदन 2012 में 4 गोल्ड और रियो 2016 में 5 गोल्ड जीतकर उन्होंने अपनी बादशाहत कायम रखी।

हार से नफरत, जीत से जुनून
फेल्प्स ने कहा कि उन्हें खुद भी याद नहीं कि उनके पास कितने सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल हैं। उनके अनुसार ओलंपिक की 30 रेस में से 28 में उन्होंने मेडल जरूर जीते, लेकिन चर्चा सिर्फ उन 23 गोल्ड की होती है क्योंकि बाकी रेसों में वह पूरी तरह तैयार नहीं थे। उन्होंने माना कि कुछ मौकों पर कोई और उनसे ज्यादा बेहतर तैयारी के साथ उतरा। यही वजह है कि वे उन रेसों को हार मानते हैं। फेल्प्स की यह सोच बताती है कि वह खुद से कितनी ऊंची उम्मीद रखते थे और क्यों उन्हें अब तक का सबसे महान ओलंपियन कहा जाता है।

पूल के बाहर नई भूमिका
संन्यास के बाद माइकल फेल्प्स अब खेल से दूर जरूर हैं, लेकिन समाज के लिए उनका योगदान जारी है। वह माइकल फेल्प्स फाउंडेशन के जरिए मानसिक स्वास्थ्य, फिट लाइफस्टाइल और पानी में सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने में जुटे हैं। फेल्प्स खुलकर बताते हैं कि मानसिक मजबूती किसी भी चैंपियन के लिए कितनी जरूरी है। गोल्ड जीतने वाली सोच ने उन्हें इतिहास बनाया, लेकिन अब वही अनुभव वह नई पीढ़ी को सिखाने में लगा रहे हैं।

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