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संजू सैमसन बनाम ईशान किशन, आखिरी मोड़ पर चयन की जंग, एक मैच तय करेगा वर्ल्ड कप का टिकट

टी20 वर्ल्ड कप से पहले संजू सैमसन और ईशान किशन के बीच चयन की जंग निर्णायक मोड़ पर है। न्यूजीलैंड सीरीज़ में फ्लॉप रहे संजू के लिए अब वॉर्मअप मैच फाइनल बन चुका है, जहां एक पारी वर्ल्ड कप का टिकट तय कर सकती है।

टी20 वर्ल्ड कप से पहले संजू सैमसन के सामने हालात बिल्कुल साफ हैं। या तो अब बड़ा प्रदर्शन होगा या फिर सपना यहीं थम जाएगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ पूरी सीरीज़ निकल गई, लेकिन वो पारी नहीं आई जिसका इंतज़ार था। हर मैच में उम्मीद जगी और फिर टूट गई। अब वक्त कम है और दबाव ज्यादा। यही वो मोड़ है जहां एक पारी करियर की दिशा बदल सकती है, वरना मौका हाथ से फिसल सकता है।

न्यूजीलैंड सीरीज़ ने बढ़ाई मुश्किल

न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैचों में संजू के बल्ले से सिर्फ 46 रन निकले। औसत और असर, दोनों ही सवालों के घेरे में रहे। चयनकर्ताओं के लिए यह चिंता की बात बनी। वहीं दूसरी ओर टीम में आए ईशान किशन ने मौके को दोनों हाथों से लपक लिया। 4 मैचों में एक शतक और एक अर्धशतक ने तस्वीर बदल दी। यहां से मुकाबला बराबरी का नहीं रहा और संजू का नाम मजबूत दावेदार से “आखिरी विकल्प” बनता दिखा।

वॉर्मअप मैच ही फाइनल क्यों है

अब साउथ अफ्रीका के खिलाफ वॉर्मअप मैच संजू के लिए सिर्फ अभ्यास नहीं, फाइनल जैसा है। नवी मुंबई के मैदान पर होने वाले इस मुकाबले के टिकट पहले ही बिक चुके हैं। स्टेडियम भरा होगा और हर गेंद पर नजरें होंगी। यहां साधारण 30–40 रन शायद काफी न हों। टीम मैनेजमेंट असर देखना चाहता है—क्या संजू दबाव में खुलकर खेल पाते हैं या नहीं।

वर्ल्ड कप में मौका तभी, जब भरोसा बने

टीम इंडिया के शुरुआती मुकाबले यूएसए और नामीबिया से हैं, जहां रन बनाना आसान माना जा रहा है। लेकिन वहां खेलने का मौका तभी मिलेगा जब अभ्यास मैच में भरोसा बने। हर शॉट, हर प्रतिक्रिया मायने रखेगी। चयन में भावनाएं नहीं, प्रदर्शन चलेगा। यही कारण है कि संजू को अब “सेफ” नहीं, “स्टेटमेंट” पारी चाहिए।

विकल्प तैयार, इसलिए जोखिम ज्यादा

संजू के करियर में यह पहली बार नहीं है जब वे दबाव में हैं, लेकिन फर्क यह है कि इस बार विकल्प पूरी तरह तैयार है। ईशान शानदार फॉर्म में हैं और टीम वर्ल्ड कप मोड में है। यहां नाम नहीं, रन बोलते हैं। अगर बल्ला नहीं चला तो फैसला सख्त होगा और नुकसान सीधा वर्ल्ड कप के सपने पर पड़ेगा।

फैसले की घड़ी और चयनकर्ताओं की नजर

अब गेंद संजू के पाले में है। एक बड़ी पारी चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन—खासतौर पर गौतम गंभीर—को संदेश दे सकती है कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ। वरना कहानी किसी और के नाम लिखी जाएगी। आखिरी पन्ना लिखा जा रहा है, देखना यही है कि उस पर नाम किसका होगा।

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