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लाहौर हमले को 17 साल, वह काला दिन जिसने क्रिकेट को हिला दिया और पाकिस्तान से वर्षों तक दूर रहीं विदेशी टीमें

3 मार्च 2009 के लाहौर हमले को 17 साल पूरे हुए। श्रीलंका टीम पर हुए आतंकी हमले ने पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट रोक दिया। वर्षों तक विदेशी टीमें दूर रहीं और सुरक्षा मानकों में बड़ा बदलाव आया।

3 मार्च 2026 को लाहौर में हुए उस आतंकी हमले को 17 साल पूरे हो गए, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। यह घटना क्रिकेट इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में गिनी जाती है। इस हमले के बाद पाकिस्तान क्रिकेट को बड़ा झटका लगा और लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय टीमें वहां खेलने नहीं गईं।

कैसे हुआ हमला
2009 में श्रीलंका की टीम पाकिस्तान दौरे पर थी। लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में टेस्ट मैच खेला जा रहा था। 3 मार्च की सुबह खिलाड़ी होटल से बस में स्टेडियम जा रहे थे। रास्ते में हथियारों से लैस आतंकियों ने काफिले पर हमला कर दिया। अचानक गोलियों की आवाज से माहौल दहशत में बदल गया।

बस ड्राइवर की बहादुरी
हमले के दौरान बस चालक ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने तेज रफ्तार से बस को स्टेडियम के भीतर पहुंचाया। इसी साहस ने कई खिलाड़ियों की जान बचाई। इस हमले में सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 8 लोगों की मौत हुई, जबकि कई खिलाड़ी घायल हुए।

घायल हुए बड़े खिलाड़ी
श्रीलंकाई टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी इस हमले में जख्मी हुए थे। कुछ को गोली के छर्रे लगे, तो कुछ को गंभीर चोटें आईं। हालांकि सभी खिलाड़ी बच गए, लेकिन यह घटना उनके लिए हमेशा की दर्दनाक याद बन गई। मैच तुरंत रद्द कर दिया गया और सीरीज भी खत्म कर दी गई।

क्रिकेट पर पड़ा असर
इस हमले के बाद पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट लगभग ठप हो गया। विदेशी टीमों ने वहां जाने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान को अपने घरेलू मुकाबले यूएई में खेलने पड़े। धीरे-धीरे हालात सुधरे और कुछ वर्षों बाद टीमें फिर से पाकिस्तान जाने लगीं।

अब भी याद है वह दिन
लाहौर का यह हमला खेल जगत के लिए बड़ा सबक साबित हुआ। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दुनिया भर में नए मानक तय किए गए। आज भी जब 3 मार्च की तारीख आती है, तो उस काले दिन की याद क्रिकेट प्रेमियों के मन में ताजा हो जाती है।

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