
वर्ल्ड नंबर-1 को हराकर फाइनल में पहुंचे आयुष शेट्टी, क्या रचेंगे इतिहास? 61 साल बाद गोल्ड का सपना
आयुष शेट्टी ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 के सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर-1 कुनलावुत विटिडसर्न को हराकर फाइनल में जगह बना ली। अब उनके पास 61 साल बाद भारत को पुरुष सिंगल्स गोल्ड दिलाने का ऐतिहासिक मौका है।
बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 में आयुष शेट्टी ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने पूरे खेल जगत को चौंका दिया। उन्होंने सेमीफाइनल में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी कुनलावुत विटिडसर्न को 10-21, 21-19, 21-17 से हराकर फाइनल में जगह बना ली। करीब 1 घंटे 15 मिनट तक चले इस मुकाबले में आयुष ने पहले गेम हारने के बाद शानदार वापसी की और लगातार दो गेम जीतकर बड़ा उलटफेर कर दिया।
धैर्य और आक्रामक खेल का शानदार मेल
इस मुकाबले में आयुष शेट्टी का खेल हर मायने में शानदार रहा। पहले गेम में पिछड़ने के बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदली और दूसरे गेम में धैर्य के साथ खेलते हुए वापसी की। तीसरे गेम में उन्होंने आक्रामक अंदाज अपनाया और नेट पर बेहतरीन कंट्रोल के साथ मैच अपने नाम कर लिया। विटिडसर्न जैसे ओलंपिक मेडलिस्ट खिलाड़ी को हराना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
इतिहास दोहराने के करीब आयुष
आयुष शेट्टी अब इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाले चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं। उनसे पहले एच. एस. प्रणय 2018 में इस स्तर तक पहुंचे थे। वहीं पुरुष सिंगल्स में 1965 में दिनेश खन्ना ने फाइनल जीतकर गोल्ड मेडल हासिल किया था। अब 61 साल बाद आयुष के पास इतिहास दोहराने का सुनहरा मौका है।
फाइनल तक का सफर रहा शानदार
आयुष का इस टूर्नामेंट में सफर बेहद दमदार रहा है। उन्होंने क्वार्टरफाइनल में वर्ल्ड नंबर-4 जोनाथन क्रिस्टी को हराया, जो उनके खिलाफ पहली जीत थी। इससे पहले उन्होंने वर्ल्ड नंबर-7 लि शिफिंग को भी मात दी और चाउ तिएन-चेन जैसे दिग्गज को हराकर सेमीफाइनल तक पहुंचे। लगातार बड़े खिलाड़ियों को हराने से उनका आत्मविश्वास चरम पर है।
अन्य भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन
जहां आयुष शेट्टी ने इतिहास रचने की ओर कदम बढ़ाया है, वहीं अन्य भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। पीवी सिंधु दूसरे दौर में ही बाहर हो गईं, जबकि लक्ष्य सेन पहले ही राउंड में हार गए। ऐसे में अब भारत की उम्मीदें पूरी तरह आयुष शेट्टी पर टिकी हैं। अगर वह फाइनल जीतने में सफल होते हैं, तो यह भारतीय बैडमिंटन के लिए एक ऐतिहासिक पल होगा।
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