
बांग्लादेश क्रिकेट में भूचाल, खिलाड़ियों की आवाज उठाने पर जान से मारने की धमकी, बोर्ड बनाम खिलाड़ी आमने-सामने
बांग्लादेश क्रिकेट में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। खिलाड़ियों की आवाज उठाने पर वेलफेयर एसोसिएशन अध्यक्ष मोहम्मद मिथुन को जान से मारने की धमकी मिली। बोर्ड और खिलाड़ियों की टकराव की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है।
बांग्लादेश क्रिकेट इस वक्त गंभीर विवाद के दौर से गुजर रहा है। मामला अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जान से मारने की धमकियों तक पहुंच गया है। बांग्लादेश क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद मिथुन ने खुलासा किया है कि खिलाड़ियों के हित में आवाज उठाने के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। यह विवाद तब और गहरा गया जब खिलाड़ियों ने सामूहिक रूप से मैच खेलने से इनकार कर दिया। इससे साफ है कि क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच तनाव अब खुलकर सामने आ चुका है।
KKR का फैसला बना विवाद की जड़
इस पूरे विवाद की जड़ एक अंतरराष्ट्रीय फैसले से जुड़ी मानी जा रही है। कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को अपनी टीम से बाहर कर दिया था। इसके पीछे बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर सुरक्षा चिंताएं बताई गईं। इस फैसले से बांग्लादेश सरकार और क्रिकेट बोर्ड में नाराजगी फैल गई। इसी दौरान बीसीबी की फाइनेंस कमिटी के चेयरमैन नजमुल इस्लाम ने खिलाड़ियों को लेकर विवादित बयान दे दिया, जिसने आग में घी डालने का काम किया।
खिलाड़ियों की आवाज बने मिथुन, लेकिन बढ़ा खतरा
मोहम्मद मिथुन ने क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष के तौर पर खिलाड़ियों की सुरक्षा और सम्मान की बात उठाई। उन्होंने साफ कहा कि उनका मकसद सिर्फ खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा करना है। लेकिन इसी के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। मिथुन ने कहा कि यह उनके जीवन का पहला मौका है जब उन्हें ऐसी धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने कभी देश के खिलाफ कुछ नहीं कहा, बल्कि सिर्फ क्रिकेट और खिलाड़ियों के हित में बात रखी है।
बांग्लादेश क्रिकेट के सामने बड़ा संकट
इस विवाद के चलते बांग्लादेश क्रिकेट एक बड़े संकट में फंसता नजर आ रहा है। खिलाड़ी मैदान पर उतरने से मना कर चुके हैं और बोर्ड के भीतर भी असहमति बढ़ रही है। जानकारों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर बांग्लादेश क्रिकेट की साख और अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ सकता है। मोहम्मद मिथुन ने साफ संदेश दिया है कि संगठन का काम ही खिलाड़ियों की आवाज बनना है और वह इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे। अब देखने वाली बात होगी कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस संकट को कैसे संभालता है।
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