
सरकार का फैसला भारी पड़ा, टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर हुआ बांग्लादेश, कप्तान चाहकर भी नहीं बदल पाए टीम की किस्मत
सरकारी फैसले के चलते बांग्लादेश का टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होना तय माना जा रहा है। खिलाड़ियों और कप्तान की इच्छा के बावजूद भारत न जाने का निर्णय लिया गया, जिससे बांग्लादेश क्रिकेट में निराशा गहरा गई।
बांग्लादेश क्रिकेट के लिए गुरुवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। टीम होटल से निकलते वक्त खिलाड़ियों के चेहरे साफ बता रहे थे कि वे हालात से समझौता कर चुके हैं। कप्तान लिट्टन कुमार दास समेत पूरी टीम पर मायूसी छाई हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे खिलाड़ियों ने सरकार और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड द्वारा तय किए गए फैसले को चुपचाप स्वीकार कर लिया हो। पिछले साल जुलाई में अवामी लीग सरकार के हटने के बाद सत्ता में आई नई सरकार के दौर में बीसीबी पूरी तरह सरकारी रुख के साथ खड़ा नजर आया। इस बदलाव का असर अब सीधे क्रिकेट पर दिखने लगा है।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर होना तय
बांग्लादेश का टी20 वर्ल्ड कप 2026 खेलना अब लगभग असंभव माना जा रहा है। टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत जाने से इनकार कर दिया है। इसके बाद माना जा रहा है कि आईसीसी बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को मौका दे सकता है। खिलाड़ियों और खेल सलाहकार आसिफ नजरुल के बीच हुई बैठक को अहम बताया गया, लेकिन हकीकत में इस बैठक का फैसला पर कोई असर नहीं पड़ा। सरकार ने साफ कर दिया कि वह अपना रुख नहीं बदलेगी और उसने आईसीसी पर निष्पक्षता न दिखाने का आरोप भी लगाया है।
खिलाड़ियों की राय को नहीं मिली अहमियत
सूत्रों के मुताबिक खिलाड़ियों को बैठक में राय लेने के लिए नहीं बल्कि पहले से तय फैसले की जानकारी देने के लिए बुलाया गया था। एक खिलाड़ी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बैठक से पहले ही सरकार और बीसीबी अपना मन बना चुके थे। खिलाड़ियों से सिर्फ यह कहा गया कि टीम भारत नहीं जाएगी। पहले जहां खिलाड़ियों की बात सुनी जाती थी, अब हालात बदल चुके हैं। खिलाड़ियों को यह अहसास हो गया कि उनकी राय का कोई महत्व नहीं रह गया है। इससे टीम के भीतर निराशा और गहरी हो गई।
कप्तान खेलना चाहते थे, लेकिन आदेश भारी पड़ा
यह भी सामने आया है कि टी20 कप्तान लिट्टन दास और टेस्ट कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने बैठक में साफ कहा था कि वे वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं। इसके बावजूद सरकारी और बीसीबी अधिकारियों ने पुराने सुरक्षा मामलों का हवाला देकर उनकी बात को खारिज कर दिया। अधिकारियों ने दर्शकों और पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। खिलाड़ियों को यह भी बताया गया कि भारतीय बोर्ड की ओर से कोई औपचारिक संपर्क नहीं हुआ है। एक खिलाड़ी ने निराश होकर कहा कि अगर टीम नहीं जाती तो सबसे बड़ा नुकसान बांग्लादेश क्रिकेट का ही होगा।
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