
टेस्ट में हार का असर या बड़ा बदलाव तय, क्या गंभीर का कोचिंग रोल बंटेगा और नई दिशा लेगा टीम इंडिया?
टेस्ट में हार के बाद गौतम गंभीर की कोचिंग भूमिका पर सवाल उठे हैं। सीमित ओवरों में सफलता के बावजूद टेस्ट में बदलाव की चर्चा तेज है। बीसीसीआई के भीतर कोचिंग बंटवारे पर मंथन जारी है।
वनडे और टी20 क्रिकेट में आईसीसी और एसीसी ट्रॉफी जिताने वाले गौतम गंभीर का रिकॉर्ड सीमित ओवरों में मजबूत रहा है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में तस्वीर उतनी संतोषजनक नहीं दिखती। शीर्ष टीमों के खिलाफ लगातार हार के बाद गंभीर की टेस्ट कोचिंग पर सवाल उठने लगे हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज हार के बाद बीसीसीआई के भीतर यह चर्चा तेज हुई कि क्या पारंपरिक प्रारूप के लिए अलग सोच की जरूरत है। इसी दौरान अनौपचारिक तौर पर वीवीएस लक्ष्मण से भी टेस्ट टीम की कोचिंग को लेकर राय ली गई, हालांकि उन्होंने इसमें रुचि नहीं दिखाई।
बीसीसीआई के भीतर असमंजस
गौतम गंभीर का बीसीसीआई के साथ करार 2027 वनडे विश्व कप तक है, लेकिन इस पर पुनर्विचार की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। आने वाले टी20 विश्व कप में भारत के प्रदर्शन को इस फैसले से जोड़ा जा रहा है। बोर्ड के गलियारों में इस बात को लेकर दुविधा बनी हुई है कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 चक्र के बचे हुए नौ टेस्ट मैचों के लिए गंभीर ही सही विकल्प हैं या नहीं। श्रीलंका, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत सीरीज आगे हैं, जो इस फैसले को और अहम बना देती हैं।
टेस्ट कोचिंग से अलगाव की अटकलें
बीसीसीआई सूत्रों के मुताबिक गंभीर को सीमित ओवरों में पूरा समर्थन हासिल है। अगर टीम टी20 विश्व कप जीतती है या फाइनल तक पहुंचती है, तो उनके पद पर बने रहने की संभावना मजबूत है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। गंभीर के पक्ष में यह बात जरूर जाती है कि टेस्ट कोचिंग के लिए फिलहाल ज्यादा विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। वीवीएस लक्ष्मण जैसे नाम इस भूमिका के लिए इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में बोर्ड के सामने सवाल यही है कि क्या तीनों फॉर्मेट के लिए एक ही कोच रखा जाए या अलग-अलग प्रारूपों के लिए अलग रणनीति अपनाई जाए।
ड्रेसिंग रूम में बढ़ी बेचैनी
गंभीर के कार्यकाल में टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम का माहौल भी चर्चा में है। कुछ खिलाड़ियों को अब वैसी सुरक्षा और स्पष्टता महसूस नहीं हो रही, जैसी राहुल द्रविड़ के दौर में थी। द्रविड़ के समय खिलाड़ियों की भूमिकाएं तय थीं और उन्हें खुद को साबित करने के लिए समय मिलता था। शुभमन गिल को टी20 विश्व कप टीम से बाहर करने के फैसले को भी गंभीर की सोच से जोड़ा जा रहा है। खिलाड़ियों के बीच यह संदेश गया है कि अगर भविष्य का पोस्टर बॉय भी सुरक्षित नहीं है, तो किसी की जगह पक्की नहीं। टी20 विश्व कप और उसके बाद आने वाला आईपीएल का दौर बीसीसीआई को यह तय करने का मौका देगा कि टीम इंडिया के लिए आगे एक कोच सही है या अलग-अलग प्रारूपों के लिए अलग नेतृत्व जरूरी हो गया है।
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