
एशिया कप 2025 से भारत के वर्ल्ड कप मिशन की शुरुआत, सिर्फ एशिया की नहीं, कप्तानी और टीम संतुलन का भी होगा बड़ा इम्तिहान
एशिया कप 2025 भारत के लिए वर्ल्ड कप मिशन की शुरुआत है। सूर्या की कप्तानी, गिल की उपकप्तानी और टीम कॉम्बिनेशन की कसौटी पर यह टूर्नामेंट अहम साबित होगा। बीसीसीआई गिल को भविष्य का कप्तान बनाने की ओर बढ़ रहा है।
यूएई में आज से एशिया कप 2025 का आगाज हो गया है। इस बार टूर्नामेंट टी-20 फॉर्मेट में खेला जा रहा है। इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है क्योंकि अगले साल होने वाले भारत-श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी वाले टी-20 वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया को लगभग 20 मुकाबले खेलने हैं। एशिया कप का फाइनल भी इसी तैयारी का हिस्सा है।
भारत का असली मुकाबला खुद से
एशिया कप में भारत की भिड़ंत पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसी टीमों से होगी, लेकिन असली जंग खुद के भीतर है। कप्तानी का तालमेल, रणनीति का संतुलन और ड्रेसिंग रूम का माहौल ही इस टूर्नामेंट में सबसे अहम साबित होगा। यह एशिया कप सिर्फ ट्रॉफी जीतने का नहीं, बल्कि वर्ल्ड कप से पहले सही टीम कॉम्बिनेशन ढूंढने का मंच है।
गिल को उपकप्तान बनाना सबसे बड़ा बदलाव
सबसे बड़ा बदलाव है शुभमन गिल को उपकप्तान बनाना। कप्तान सूर्यकुमार यादव अब तक शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं और उनका जीत का रिकॉर्ड 80% तक पहुंच गया है। उनकी आक्रामक सोच ने टीम इंडिया को मजबूती दी है। लेकिन अचानक गिल को उपकप्तान बनाना कोई साधारण फैसला नहीं है। इस फैसले का संदेश साफ है कि बीसीसीआई गिल को भविष्य का ऑल-फॉर्मेट कप्तान बनाने की तैयारी कर रही है। ठीक वैसे ही जैसे कभी एमएस धोनी ने विराट कोहली को ग्रूम किया था, अब वही प्रक्रिया गिल के साथ दोहराई जा रही है।
क्रोनोलॉजी क्या कहती है?
हाल ही में गिल को टेस्ट टीम का कप्तान बनाया गया। अब एशिया कप में उन्हें टी-20 उपकप्तानी देना यही दिखाता है कि बोर्ड उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी देने में देर नहीं करना चाहता। यह कदम बताता है कि आने वाले वक्त में भारतीय क्रिकेट की कमान गिल के हाथों में देखने को मिल सकती है।
सूर्या का अनुभव बनाम गिल का भविष्य
सूर्यकुमार यादव 34 साल की उम्र में हैं और अभी टीम को सफलतापूर्वक लीड कर रहे हैं। लेकिन क्रिकेट में भविष्य की तैयारी आज से ही करनी पड़ती है। भारत जैसे मजबूत क्रिकेटिंग नेशन के पास विकल्पों की कमी नहीं है। एक साथ तीन टीमें इंटरनेशनल लेवल पर उतारने की क्षमता बताती है कि कप्तानी के नए चेहरों को आजमाना भी जरूरी है। अगर गिल उपकप्तान रहते हुए खुद को साबित कर लेते हैं, तो उन्हें टी-20 का अगला कप्तान बनाना सिर्फ औपचारिकता होगी।
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