क्रिकेट

करो या मरो में करुण की करामात: 3149 दिनों बाद चमका बल्ला

3149 दिनों के लंबे इंतज़ार के बाद करुण नायर ने ओवल टेस्ट में अर्धशतक जड़कर वापसी की. शुरुआती झटकों के बाद उन्होंने टीम को संभाला. यह पारी उनके करियर और भारतीय टीम दोनों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के आखिरी मैच में करुण नायर के लिए यह मुकाबला किसी फाइनल से कम नहीं था. तीन मैचों में बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहने के बाद उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया था. लेकिन ओवल टेस्ट में कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल ने उन्हें एक और मौका दिया, जिसे करुण ने दोनों हाथों से थाम लिया. उन्होंने दबाव भरे माहौल में शानदार फिफ्टी जमाई और अब उनकी नजरें शतक पर टिक गई हैं.

3149 दिनों का सूखा टूटा
करुण का यह अर्धशतक बेहद खास है, क्योंकि यह टेस्ट क्रिकेट में उनके लिए 3149 दिनों बाद 50+ स्कोर है. पिछली बार दिसंबर 2016 में चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 303* रन ठोके थे. इतना लंबा इंतजार किसी भी बल्लेबाज के लिए कठिन होता है. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से किसी भारतीय बल्लेबाज के लिए यह दूसरा सबसे लंबा अंतर है. इससे ज्यादा इंतजार सिर्फ पार्थिव पटेल को करना पड़ा था, जिनके दो टेस्ट अर्धशतक के बीच 4426 दिन का फासला था.

टीम संकट में, करुण ने संभाला मोर्चा
पांचवें टेस्ट के पहले दिन ओवल की पिच पर भारत ने जल्दी-जल्दी छह विकेट गंवा दिए थे. ऐसे में करुण ने वाशिंगटन सुंदर के साथ मिलकर पारी को थाम लिया और टीम का स्कोर 200 के पार पहुंचाया. यह साझेदारी भारत के लिए राहत की सांस थी और करुण के लिए भरोसा लौटाने का पल. पिछले तीन मैचों में फिफ्टी के करीब पहुंचकर विकेट गंवाने वाले करुण ने इस बार संयम और धैर्य से बल्लेबाजी की.

कोच का भरोसा और तारीफ
भारत के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने करुण की पारी की सराहना की. उन्होंने कहा, “उन्होंने पहले टेस्ट में छठे नंबर पर और बाकी दो टेस्ट में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की. उनकी लय और स्पीड शानदार थी. लंबे समय बाद टीम में वापसी पर दबाव होता है, लेकिन उन्होंने इसे बेहतरीन तरीके से हैंडल किया.” यह अर्धशतक न सिर्फ करुण के करियर के लिए बल्कि भारतीय टीम के मनोबल के लिए भी अहम साबित हो सकता है.