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गोवा के जबड़े से छीनी CSK के गेंदबाज ने जीत, सांसे थाम देने वाले मैच का पढ़े रोमांच !

विजय हजारे ट्रॉफी में महाराष्ट्र ने गोवा से आखिरी ओवर में जीत छीन ली। Ramakrishna Ghosh के शानदार मेडन ओवर ने सांसें रोक देने वाले मुकाबले में महाराष्ट्र को 5 रन से यादगार जीत दिलाई।

विजय हजारे ट्रॉफी के एलीट ग्रुप सी में महाराष्ट्र और गोवा के बीच खेला गया मुकाबला रोमांच और दबाव की असली परीक्षा बन गया। इस मैच में महाराष्ट्र ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बेहद समझदारी के साथ पारी को आगे बढ़ाया। शुरुआत संभलकर की गई और विकेट बचाने पर जोर रहा। कप्तान ने जिम्मेदारी उठाते हुए एक छोर संभाले रखा और रन गति को लगातार बनाए रखा। पचास ओवर पूरे होने तक महाराष्ट्र ने सात विकेट के नुकसान पर दो सौ उनचास रन बना लिए। यह स्कोर आसान नहीं था लेकिन इतना जरूर था कि मुकाबले को आखिरी ओवर तक ले जाया जा सके। कप्तान की शतकीय पारी ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और मध्य क्रम से भी अहम योगदान मिला।

गोवा की तेज शुरुआत और फिर अचानक बिखरती पारी
लक्ष्य का पीछा करने उतरी गोवा की टीम ने शुरुआत में आक्रामक खेल दिखाया। पहले विकेट के लिए शानदार साझेदारी हुई और ऐसा लगने लगा कि मुकाबला गोवा की पकड़ में जा रहा है। गेंदबाजों पर दबाव बन गया और दर्शकों को लगा कि महाराष्ट्र का स्कोर छोटा पड़ सकता है। लेकिन जैसे ही पहला विकेट गिरा वैसे ही गोवा की पारी लड़खड़ाने लगी। लगातार अंतराल पर विकेट गिरते चले गए और दबाव बढ़ता चला गया। एक समय गोवा की टीम जीत की ओर बढ़ती दिख रही थी लेकिन अचानक हालात पलट गए और नौ विकेट गिरने तक टीम लक्ष्य से कुछ ही रन दूर रह गई।

अंतिम ओवर का तनाव और एक गेंदबाज की परीक्षा
जब आखिरी ओवर शुरू हुआ तब गोवा को जीत के लिए छह रन चाहिए थे और सिर्फ एक विकेट बाकी था। मैदान पर सन्नाटा था और हर गेंद पर सांसें थमी हुई थीं। ऐसे नाजुक मौके पर गेंद सौंपी गई महाराष्ट्र के उस खिलाड़ी को जिसने पूरे मैच में संयम दिखाया था। यह वही ऑलराउंडर था जिसने दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया। अंतिम छह गेंदों में उसने ऐसा नियंत्रण दिखाया कि गोवा का कोई भी बल्लेबाज रन नहीं निकाल सका। एक भी रन नहीं बना और पूरा ओवर मेडन चला गया। इसी ओवर ने मैच की तस्वीर बदल दी और महाराष्ट्र ने पांच रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

रामकृष्ण घोष की जीत दिलाने वाली भूमिका
इस मुकाबले के नायक रहे जम्मू नहीं बल्कि महाराष्ट्र के भरोसेमंद खिलाड़ी रामकृष्ण घोष। उन्होंने पूरे दस ओवर में सिर्फ पैंतीस रन दिए और सबसे अहम आखिरी ओवर में टीम को जीत दिलाई। उनकी गेंदबाजी ने यह साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में धैर्य और आत्मविश्वास कितना जरूरी होता है। इससे पहले उन्हें बड़ी लीग में ज्यादा मौके नहीं मिले थे लेकिन टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा बनाए रखा। यह प्रदर्शन उसी भरोसे की सच्ची तस्वीर बनकर सामने आया। महाराष्ट्र की यह जीत सिर्फ अंक तालिका की जीत नहीं थी बल्कि यह संदेश भी थी कि शांत दिमाग और मजबूत इरादों से आखिरी गेंद पर भी मैच जीता जा सकता है।

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