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सूर्या के मजाक का जवाब बना बल्ला, संजू सैमसन ने 97 रन ठोककर टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचाया और सबको चुप करा दिया

संजू सैमसन ने 97 रन की नाबाद पारी खेलकर वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच पलटा और टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचाया। चयन पर उठे सवालों के बीच उन्होंने बल्ले से जवाब दिया और आलोचकों को शांत कर दिया।

कहते हैं कि असली जवाब मैदान पर दिया जाता है और टीम इंडिया के विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने यही करके दिखाया। कुछ समय पहले तक उनकी जगह प्लेइंग ग्यारह में पक्की नहीं मानी जा रही थी। टीम संयोजन में उन्हें इधर-उधर किया जा रहा था और सवाल उठ रहे थे कि क्या उन्हें मौका मिलेगा भी या नहीं। लेकिन हालात बदले और वही खिलाड़ी टीम का सबसे बड़ा सहारा बन गया।

कोलकाता में पलटा मैच का रुख
1 मार्च को कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबला बेहद अहम था। सामने 196 रन का लक्ष्य था और सभी को उम्मीद थी कि बड़े नाम बड़ी पारी खेलेंगे। शुरुआत अच्छी नहीं रही और जल्दी-जल्दी विकेट गिरने लगे। ऐसे मुश्किल समय में संजू सैमसन ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया।

तीसरे मैच में खेली यादगार पारी
इस टूर्नामेंट में यह उनका तीसरा ही मैच था। पहले दो मुकाबलों में वे छोटी पारी खेलकर लौट गए थे, लेकिन इस बार उन्होंने मौका नहीं छोड़ा। एक छोर से टिके रहकर उन्होंने रन बनाना जारी रखा। भले ही वे शतक से 3 रन दूर रह गए, मगर 97 रन की नाबाद पारी खेलकर टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचा दिया। यह पारी उनके करियर की अहम पारियों में गिनी जाएगी।

सेलेक्शन पर उठे थे सवाल
ग्रुप स्टेज में कुछ बल्लेबाज लगातार संघर्ष कर रहे थे। ऐसे में कप्तान सूर्यकुमार यादव से पूछा गया था कि क्या सैमसन को ऊपर बल्लेबाजी के लिए मौका मिलेगा। उस समय कप्तान ने हल्के अंदाज में जवाब दिया था और कहा था कि क्या दूसरे खिलाड़ियों को बाहर कर दें। उन्होंने भरोसा जताया था कि जो संयोजन चल रहा है, वही ठीक है। उस बयान के बाद चर्चा और तेज हो गई थी।

हार के बाद बदली सोच
साउथ अफ्रीका से मिली हार के बाद टीम पर दबाव बढ़ गया। इसके बाद बदलाव हुआ और सैमसन को मौका मिला। जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने तेज 24 रन बनाकर संकेत दे दिया कि वे तैयार हैं। आखिरी मुकाबले में जब कप्तान खुद बड़ी पारी नहीं खेल सके, तब सैमसन ने मोर्चा संभाला और मैच खत्म करके ही लौटे।

मैदान पर मिला सम्मान
मैच के बाद तस्वीर बदली हुई दिखी। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी खुलकर सैमसन की तारीफ की। यह जीत सिर्फ टीम के लिए नहीं, बल्कि सैमसन के लिए भी खास थी। उन्होंने साबित कर दिया कि भरोसा देर से मिले तो भी खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से सबका नजरिया बदल सकता है। अब सेमीफाइनल में टीम इंडिया की उम्मीदें फिर से मजबूत नजर आ रही हैं।

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