
जिस टीम ने रनों से डराया था वही ढेर हो गई, एक कलाई के जादू ने बदल दी पूरी कहानी
विजय हजारे ट्रॉफी में कर्नाटक की तूफानी बल्लेबाजी एक झटके में ढेर हो गई। मध्य प्रदेश के युवा स्पिनर Shivang Kumar ने कलाई के जादू से पांच विकेट लेकर पूरी कहानी बदल दी।
विजय हजारे ट्रॉफी में जिस कर्नाटक की बल्लेबाजी ने अब तक हर मुकाबले में रनों की बरसात की थी वही टीम एक ही मैच में बिखर गई। हर मैच में शतक और बड़े स्कोर बनाने वाली कर्नाटक की टीम को मध्य प्रदेश के एक युवा गेंदबाज ने ऐसा झटका दिया कि पूरी पारी संभल ही नहीं पाई। कर्नाटक की पूरी टीम दो सौ सात रन पर सिमट गई और इस पतन की सबसे बड़ी वजह बने शिवांग कुमार। मैदान पर ऐसा लगा जैसे रन बनाने वाली मशीन अचानक जाम हो गई हो। जिस टीम से बड़े स्कोर की उम्मीद थी वही टीम संघर्ष करती नजर आई।
शिवांग कुमार की कलाई से निकला कहर
मध्य प्रदेश के शिवांग कुमार ने अपनी कलाई के जादू से कर्नाटक के बल्लेबाजों को जाल में फंसा लिया। यह गेंदबाज अलग कोण से गेंद घुमाने में माहिर है और यही कला कर्नाटक के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई। शिवांग ने बीच के क्रम को पूरी तरह तोड़ दिया। अभिनव मनोहर रविचंद्रन स्मरण श्रीशा आचार के एल श्रीजीत और श्रेयस गोपाल जैसे अहम बल्लेबाज उनकी फिरकी में उलझते चले गए। दस ओवर की गेंदबाजी में उन्होंने सिर्फ पैंतालीस रन दिए और पांच विकेट चटकाए। आखिरी विकेट जिस तरह गिरा उसने दर्शकों को भी हैरान कर दिया और यही दृश्य अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
कम अनुभव लेकिन आत्मविश्वास भरपूर
शिवांग कुमार की खास बात यह है कि वह अभी घरेलू क्रिकेट में ज्यादा पुराने नहीं हैं। इसके बावजूद उनका आत्मविश्वास किसी अनुभवी गेंदबाज जैसा दिखता है। अब तक उन्होंने एकदिवसीय प्रारूप के बहुत कम मुकाबले खेले हैं लेकिन हर मैच में अपनी छाप छोड़ी है। कर्नाटक के खिलाफ यह उनका पहला बड़ा प्रदर्शन नहीं बल्कि मेहनत का नतीजा है। वह सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी से भी टीम का साथ दे सकते हैं। कम उम्र में इस तरह का संयम और समझ भविष्य के बड़े खिलाड़ी की पहचान मानी जाती है।
मुरादाबाद से मध्य प्रदेश तक का सफर
शिवांग कुमार का जन्म उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हुआ। उनके पिता प्रवीण कुमार खुद भी उच्च स्तर पर क्रिकेट खेल चुके हैं और वर्तमान में रेलवे में सेवा दे रहे हैं। वर्ष दो हजार पंद्रह में शिवांग मध्य प्रदेश चले गए जहां उन्होंने अलग अलग आयु वर्ग की टीमों में लगातार प्रदर्शन किया। अब सीनियर टीम में जगह बनाकर उन्होंने दिखा दिया है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। आने वाले समय में अगर उन्हें बड़ा मंच मिला तो यह गेंदबाज और भी बड़े कारनामे कर सकता है। कर्नाटक के खिलाफ यह प्रदर्शन सिर्फ एक मैच नहीं बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
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