
स्मृति की कैप, संघर्ष की चमक और इंग्लैंड में अमनजोत का ऐतिहासिक धमाका
भारत की महिला टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ T20 सीरीज में लगातार दूसरी जीत दर्ज करते हुए सीरीज पर कब्जा कर लिया है. दूसरे मैच में टीम इंडिया ने 24 रन से जीत हासिल की और 3 मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली.
जहां इंग्लैंड में भारतीय पुरुष टीम का टेस्ट में कमाल दिखना अभी बाकी है, वहीं महिला क्रिकेटर्स ने कमाल कर दिखाया है. भारत की महिला टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ T20 सीरीज में लगातार दूसरी जीत दर्ज करते हुए सीरीज पर कब्जा कर लिया है. दूसरे मैच में टीम इंडिया ने 24 रन से जीत हासिल की और 3 मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली.
स्मृति से मिली कैप, अब खुद बनीं हीरो
इस जीत की हीरो रहीं 24 साल की अमनजोत कौर, जिन्हें पिछले साल स्मृति मंधाना ने इंटरनेशनल डेब्यू पर कैप पहनाई थी. अब उसी स्मृति की अगुआई में उन्होंने इतिहास रच दिया. अमनजोत ने नाबाद 63 रन की पारी खेली और फिर गेंदबाजी में भी कमाल करते हुए 1 विकेट झटका. T20 इंटरनेशनल में 60+ रन बनाकर विकेट लेने वाली वो पहली भारतीय महिला बन गईं.
गली से इंग्लैंड तक का सफर
अमनजोत का यह सफर आसान नहीं रहा. उन्होंने क्रिकेट की शुरुआत गली के लड़कों के साथ खेलकर की थी. स्कूल में भी लड़कों के साथ ही मैच खेला करती थीं. उनके पिता भूपिंदर सिंह पेशे से कारपेंटर हैं, लेकिन बेटी के क्रिकेट के जुनून में कोई कमी नहीं आने दी. उन्होंने 15 साल की उम्र में अमनजोत का दाखिला एकेडमी में कराया और बेहतर ट्रेनिंग के लिए परिवार सहित चंडीगढ़ शिफ्ट हो गए.
पिता के बलिदान का मिला फल
भूपिंदर सिंह ने बेटी के सपनों के लिए अपने काम में कटौती की, हर दिन एकेडमी छोड़ने और लाने का जिम्मा खुद उठाया. अब उसी मेहनत और त्याग का नतीजा है कि आज अमनजोत कौर ने इंग्लैंड की धरती पर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई और खुद को भारतीय क्रिकेट का नया सितारा साबित किया.
जहां एक ओर महिला क्रिकेट नई ऊंचाइयों को छू रहा है, अमनजोत कौर जैसी कहानियां भारतीय खेल जगत को प्रेरणा देती हैं – संघर्ष, सपनों और सफलता की जीती-जागती मिसाल.




