
डेब्यू कप्तानी में चुप रहा बल्ला लेकिन इतिहास बन गया, वैभव सूर्यवंशी के पहले मैच ने क्यों बढ़ा सस्पेंस ?
14 साल की उम्र में डेब्यू कप्तानी कर वैभव सूर्यवंशी इतिहास तो बना गए, लेकिन बल्ला खामोश रहा। साउथ अफ्रीका में पहला मैच दबाव भरा रहा, जिससे बहस भी छिड़ी और आगे के मुकाबलों को लेकर सस्पेंस बढ़ गया।
साउथ अफ्रीका की धरती पर अंडर 19 वनडे सीरीज के पहले मैच में बिहार के लाल वैभव सूर्यवंशी से बड़ी पारी की उम्मीद थी। सिर्फ 14 साल की उम्र में कप्तानी संभालना अपने आप में बड़ा पल था। स्टेडियम में निगाहें उसी युवा चेहरे पर टिकी थीं, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। जब वैभव आउट हुए तो सिर्फ एक विकेट नहीं गिरा, बल्कि फैंस की उम्मीदों को भी झटका लगा। विदेशी धरती पर पहला कप्तानी मैच उनके लिए भावनात्मक तौर पर भारी साबित हुआ।
कप्तानी का रिकॉर्ड, बल्ले की खामोशी
यह मुकाबला इसलिए खास था क्योंकि वैभव पहली बार भारतीय अंडर 19 टीम की कमान संभाल रहे थे। नियमित कप्तान आयुष म्हात्रे और उपकप्तान विहान मल्होत्रा के चोटिल होने के बाद जिम्मेदारी उन्हें मिली। 14 साल में कप्तान बनते ही वैभव क्रिकेट इतिहास के सबसे कम उम्र के कप्तान बन गए। रिकॉर्ड बना, लेकिन बल्लेबाजी में वो चमक नहीं दिखी जिसकी उनसे उम्मीद थी। कप्तानी की उपलब्धि और बल्ले की नाकामी ने मैच को विरोधाभासी बना दिया।
शुरुआती झटके और बिखरता टॉप ऑर्डर
भारतीय पारी की शुरुआत ही खराब रही। दूसरे ओवर में ओपनर ऐरन जॉर्ज आउट हो गए और सातवें ओवर में वैभव क्रीज पर आए। उम्मीद थी कि वो आक्रामक अंदाज दिखाएंगे, लेकिन साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों ने उन्हें बांधकर रखा। 12 गेंदों में 11 रन, दो चौके और फिर पवेलियन वापसी। इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। अभिज्ञान कुंडू और वेदांत त्रिवेदी की 33 रन की साझेदारी रन आउट से टूटी और टॉप ऑर्डर पूरी तरह दबाव में आ गया।
सोशल मीडिया बहस और आगे की चुनौती
मैच के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने सवाल उठाए तो कई फैंस ने वैभव का समर्थन किया। कम उम्र में इतना दबाव झेलना आसान नहीं होता, ये बात कई दिग्गजों ने भी मानी। एक खराब पारी से किसी खिलाड़ी की काबिलियत तय नहीं होती। सीरीज के अगले मुकाबले अभी बाकी हैं और कप्तानी का ये अनुभव वैभव को और मजबूत बना सकता है। विदेशी जमीन पर मिली यह ठोकर शायद आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी सीख साबित हो।
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