
भारतीय बैटमिंटन खिलाड़ियों जीत पर विवाद, लापरवाही की वजह से खुशी हो फीकी
वर्ल्ड यूनिर्सिटी गेम्स में भारतीय बैटमिंटन मिश्रित ने देश को गर्व का पल दिया है। इतिहास रचते हुए भारतीय खिलाड़ियो ने उपलब्धि हासिल की है। लेकिन अब इसपर एक विवाद भी हो गया है। क्या है पूरी बात, जानिए….
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों की जीत पर विवाद
वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स (WUG 2025) इस समय जर्मनी के राइन-रूहर में खेला जा रहा है। जहां पर भारतीय बैडमिंटन मिश्रित टीम ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर इतिहास रचा दिया है। लेकिन ये जीत विवाद मे है। दरअसल, 12 खिलाड़ियों की चुनी गई टीम में से छह खिलाड़ियों को कथित प्रशासनिक गलती के कारण कॉम्पिटिशन करने का मौका नहीं मिला है।
भारत की 400 मीटर रनर देवयानीबा जाला को भी यूनिवर्सिटी गेम्स से बाहर कर दिया गया। इसका कारण बताया गया है कि भारतीय अधिकारियों ने उनकी एंट्री मिस कर दी थी। उन्होंने ग्लोबल स्टेज पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए 2.5 लाख रुपए की फीस चुकाई थी, लेकिन अधिकारियों की वजह से वह हिस्सा नहीं ले सकीं। इस चूक ने न केवल खिलाड़ियों के सपनों को चोट पहुंचाई, बल्कि भारतीय यूनिवर्सिटी संघ (AIU) और टीम अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
लापरवाही बनी मौका गवाने की वजह
भारत ने मिश्रित बैडमिंटन टीम कॉम्पिटिशन में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। ये वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भारत का इस खेल में पहला मेडल है। लेकिन इस उपलब्धि की खुशी भी नहीं खिलाड़ी मना सके थे, उसी बीच उनकी खुशी फीकी पड़ गई, जब ये खुलासा हुआ कि 12 खिलाड़ियों की चुनी गई टीम में से केवल छह को ही खेलने की अनुमति मिली है। बताया जा रहा है कि 16 जुलाई को प्रबंधकों की बैठक में भारतीय अधिकारियों ने सभी 12 खिलाड़ियों के नाम सही ढंग से जमा नहीं किए, जिसके कारण छह खिलाड़ी मैदान पर उतरने से वंचित रह गए है।
जिन 6 खिलाड़ियों को बाहर किया गया है, उनमें से एक खिलाड़ी अलीशा खान ने इंस्टाग्राम पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए लिखा कि ये केवल मिसमैनेजमेंट नहीं है, ये करियर को नुकसान पहुंचाने वाला है। हम जवाब, जवाबदेही और हमारी आवाज सुनी जाने की मांग करते हैं। हमने कोई मैच नहीं गंवाया, हमने भाग लेने का अपना अधिकार ही खो दिया।
भारतीय अधिकारी ने क्या कहा
भारतीय यूनिवर्सिटी संघ की सचिव डॉ. पंकज मित्तल ने इस बारे में बात की पुष्टि की। उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि “हमें इस मामले की जानकारी है और इसकी जांच की जा रही है। ’ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ये गलती केवल एक तकनीकी गलती नहीं थी, बल्कि भुवनेश्वर के कालिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी के एक ट्रायल की वजह से हुआ है। मामले में आगे क्या होता है, सभी को इसका इंतजार है।




