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ना ट्रॉफी, ना शोर, फिर 2025 में क्यों नहीं टूटे सतविक-चिराग, पढ़ें Inside Story

2025 में सतविक–चिराग कोई खिताब नहीं जीत सके, लेकिन 16 टूर्नामेंट में छह सेमीफाइनल और दो फाइनल तक पहुंचकर उन्होंने भारतीय बैडमिंटन को संभाले रखा। खेल शैली में बदलाव और नई रणनीति के साथ यह जोड़ी फिर टॉप-5 में लौट आई।

2025 सतविकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के करियर का सबसे चमकदार साल नहीं रहा। साल खत्म होने तक उनके हाथ कोई खिताब नहीं लगा और छह साल में पहली बार ऐसा हुआ। लेकिन इसके बावजूद भारतीय बैडमिंटन को सबसे ज्यादा संभालने वाला नाम यही जोड़ी बनी रही। 16 बड़े टूर्नामेंट में खेलते हुए इस जोड़ी ने छह सेमीफाइनल और दो फाइनल खेले। यानी 16 में से 9 बार टॉप चार में जगह बनाई। यह आंकड़ा किसी भी भारतीय शटलर से कहीं बेहतर रहा। ऐसे समय में जब भारत के कई सिंगल्स खिलाड़ी जूझते नजर आए, यह जोड़ी बिना सुर्खियों के खल को जिंदा रखे रही।

उम्मीदों का बोझ और गिरती रफ्तार
2021 से 2023 तक सब कुछ आसान लगता था। ताकतवर स्मैश, आक्रामक खेल और थॉमस कप की ऐतिहासिक जीत ने इस जोड़ी को शिखर पर पहुंचा दिया। लेकिन 2024 ने तस्वीर बदल दी। विरोधी कोचों ने उनकी कमजोरियों को पहचान लिया। फाइनल में हार मिलने लगी और ओलंपिक पदक चूकना बड़ा झटका साबित हुआ। कोच मैथियास बोए के जाने के बाद टीम को नए सिरे से खुद को समझना पड़ा। आत्मविश्वास और पुरानी धार दोनों पर असर पड़ा। यह वह दौर था जब लगने लगा कि यह जोड़ी भी शायद पीछे छूट रही है।

खेल बदला तो कहानी बदली
मलेशियाई कोच टैन किम हर के आने के बाद बदलाव शुरू हुआ। सतविक और चिराग ने सिर्फ आक्रमण पर भरोसा करना छोड़ दिया और अपने खेल में धैर्य और बचाव जोड़ा। तेज ड्राइव, चतुर सर्विस और ऑल कोर्ट मूवमेंट पर काम किया गया। 2025 में भले खिताब नहीं मिले लेकिन यह जोड़ी वर्ल्ड रैंकिंग 27 से फिर टॉप 5 में लौट आई। यह वापसी इस बात का सबूत थी कि उन्होंने हार से सीख ली है। अब उन्हें सिर्फ एकतरफा आक्रामक जोड़ी कहना आसान नहीं रहा।

शोर नहीं लेकिन मजबूत नींव
2025 सुर्खियों वाला साल नहीं था लेकिन इसने इस साझेदारी को और मजबूत बना दिया। व्यक्तिगत दुख से जूझते सतविक और मानसिक मजबूती जोड़ते चिराग ने एक दूसरे पर भरोसा बनाए रखा। वे मैदान के बाहर करीबी दोस्त न हों लेकिन कोर्ट पर उनका भरोसा अडिग है। भारत में जहां क्रिकेट के बाहर उपलब्धियों को कम आंका जाता है, वहां यह जोड़ी बिना शोर के अपनी विरासत गढ़ रही है। खिताब भले न हों लेकिन 2025 ने यह साफ कर दिया कि LA 2028 की राह पर भारत की सबसे मजबूत उम्मीद आज भी यही जोड़ी है।

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