
बिना हाथों की शीतल ने रचा कमाल! अब करेंगी एबल बॉडी तीरंदाजों से मुकाबला, सपना बना हकीकत
बिना हाथों की शीतल देवी अब एबल बॉडी तीरंदाजों के खिलाफ खेलेंगी. वर्ल्ड पैरा गोल्ड विनर शीतल ने जेद्दा एशिया कप के लिए भारतीय जूनियर टीम में जगह बनाई और इतिहास रच दिया. उनकी कहानी संघर्ष और प्रेरणा की मिसाल है.
वर्ल्ड पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली शीतल देवी का बड़ा सपना आखिरकार पूरा हो गया. जन्म से ही बिना हाथों के पैदा हुई शीतल ने पिछले साल ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में कहा था कि वो एक दिन सक्षम यानी एबल-बॉडी खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करना चाहती हैं. अब ठीक एक साल बाद वो एबल बॉडी जूनियर भारतीय टीम में शामिल हो गई हैं.
जेद्दा में होगा ऐतिहासिक मुकाबला
शीतल देवी को जेद्दा में होने वाले एशिया कप स्टेज 3 के लिए भारतीय एबल बॉडी जूनियर टीम में जगह मिली है. वो ऐसा करने वाली भारत की पहली पैरा तीरंदाज बनी हैं. हरियाणा के सोनीपत में हुए नेशनल ट्रायल्स में शीतल ने 60 से ज्यादा एबल बॉडी तीरंदाजों के बीच तीसरा स्थान हासिल किया. उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 703 अंक जुटाए जो टॉप क्वालिफायर के बराबर थे.
संघर्ष और मेहनत की मिसाल
कटरा में श्री माता वैष्णो देवी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में ट्रेनिंग लेने वाली शीतल ने अपने पैर की मदद से तीरंदाजी करना सीखा. कोच गौरव शर्मा के साथ उन्होंने नए नियमों के मुताबिक शूटिंग स्टाइल बदली और दोबारा शुरुआत की. कई बार दर्द और थकान झेलने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी.
कोच बोले- उसका तीर ही जवाब देगा
कोच गौरव शर्मा ने बताया कि शीतल की मेहनत ने सभी को हैरान कर दिया. उन्होंने कहा, “लोग बोलते रहे कि उसका समय खत्म हो गया, लेकिन हमने कहा- हमारा तीर ही जवाब देगा.” सितंबर में शीतल ने ग्वांगझू में पैरा वर्ल्ड कंपाउंड चैंपियन बनकर सबको जवाब दे दिया.
अब एबल बॉडी मुकाबले की तैयारी
गौरव शर्मा ने कहा कि अब हमारा फोकस शीतल के पैरा और एबल बॉडी दोनों कैंपेन पर रहेगा. अगले साल एशियन पैरा गेम्स के साथ-साथ हम उसे एबल बॉडी सीनियर इवेंट के लिए भी ट्रायल देने की तैयारी कर रहे हैं.
दुनिया के लिए प्रेरणा बनी शीतल
तुर्की की पैरा चैंपियन ओज्नुर गिर्दी से प्रेरित शीतल अब दुनिया की उन गिनी-चुनी एथलीटों में शामिल हो गई हैं, जो पैरा और एबल बॉडी दोनों कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. ये उपलब्धि न सिर्फ तीरंदाजी बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत के लिए एक गर्व का पल है.
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