
बातचीत के शौकीन युशी तनाका: घरेलू लॉर्ड से अंतर्राष्ट्रीय मंच के स्टार बनने का सफर
जापान के उभरते बैडमिंटन स्टार युशी तनाका घरेलू स्तर पर सफल रहने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर धमाल मचा रहे हैं। ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर 500 के फाइनल में पहुंचकर उन्होंने साबित किया कि वह अब सिर्फ "डोमेस्टिक लॉर्ड" नहीं रहे।
विश्व रैंकिंग में 27वें स्थान पर मौजूद जापानी बैडमिंटन खिलाड़ी युशी तनाका को बातचीत करना बेहद पसंद है. उन्होंने एक बार जापानी मीडिया को बताया था कि जब वह बोलना शुरू करते हैं तो रुकते नहीं हैं. अब इस शटलर को उम्मीद होगी कि अंतर्राष्ट्रीय सर्किट में उनकी जीत का सिलसिला कभी न रुके. जब उन्होंने यह बात कही थी, तब वह कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर रहे थे और घरेलू स्तर पर खेलते हुए राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का प्रयास कर रहे थे.
पेरिस विश्व चैंपियनशिप से मिली नई रफ्तार
युशी तनाका ने हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई ओपन सुपर 500 के फाइनल में जगह बनाकर अपनी फॉर्म सिद्ध की, जहाँ उनका मुकाबला भारतीय खिलाड़ी लक्ष्य सेन से हुआ. सेमीफाइनल में उन्होंने ताइवान के लिन चुन.यी को सीधे सेटों में हराया. इससे पहले, पेरिस विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने वर्ल्ड नंबर 4 चीन के ली शिफेंग को हराकर सबको चौंका दिया था. अन्य जापानी एकल शटलरों की रक्षात्मक शैली से अलग, तनाका जबरदस्त आक्रामक खेल दिखाते हैं. उनके खेल में स्पीड और जोश साफ झलकता है, जिसका श्रेय उनके कोच शो सासाकी को जाता है. पूर्व वर्ल्ड चैंपियन केंटो मोमोटा ने उनके शटल कंट्रोल को संतुलित करने में मदद की है.
डोमेस्टिक लॉर्ड की छवि तोड़ने का इरादा
तनाका ने टॉप जापानी खिलाड़ी कोडाई नाराओका को लगातार हराकर बहुत आत्मविश्वास हासिल किया है. घरेलू टूर्नामेंट्स में वह कोडाई से हमेशा आगे रहते थे, लेकिन विदेशों में अच्छा प्रदर्शन न करने के कारण उनकी आलोचना होती थी और उन्हें ‘डोमेस्टिक लॉर्ड’ कहा जाता था. राष्ट्रीय टीम सेटअप में आने के बाद तनाका ने खुद को साबित करने का दृढ़ संकल्प लिया. उन्होंने यह इरादा किया कि वह अपनी पूरी कोशिश करेंगे ताकि लोग यह न कहें कि तनाका सिर्फ जापान में ही जीत सकते हैं. उनका लक्ष्य दुनिया के टॉप 10 खिलाड़ियों में शामिल होना है.
पूर्व चैंपियन केंटो मोमोटा का मार्गदर्शन
मोमोटा से जुड़ने के तुरंत बाद, तनाका ने ऑरलियन्स मास्टर्स का खिताब जीता था. अपना दूसरा ऑल जापान टाइटल जीतने के बाद उन्होंने मोमोटा के योगदान के बारे में बताया था. उन्होंने कहा था कि मोमोटा से एक चैंपियन के तौर पर व्यवहार और सोच जैसी सबसे जरूरी चीजें सीखने को मिली हैं. ओलंपिक पदक से चूकने और मलेशिया में एक दुर्घटना के बाद आँख में समस्या होने पर मोमोटा ने जापान में कोच के रूप में अपनी दूसरी पारी शुरू की थी.
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