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64 मिनट की जंग, 59 शॉट्स की रैली… पर क्यों टूटा सिंधु का छठा विश्व पदक सपना?

पीवी सिंधु का विश्व चैंपियनशिप में छठा पदक जीतने का सपना क्वार्टर फाइनल में इंडोनेशिया की कुसुमा वर्दानी से हार के कारण टूट गया। 64 मिनट की कड़ी जंग के बाद सिंधु की कोशिशें सफल नहीं हो पाईं।

भारतीय बैडमिंटन की स्टार और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु का विश्व चैंपियनशिप में छठा पदक जीतने का सपना शुक्रवार को टूट गया. क्वार्टर फाइनल में इंडोनेशिया की नौवीं वरीयता प्राप्त पुत्री कुसुमा वर्दानी ने उन्हें तीन गेम तक चले रोमांचक मुकाबले में 14-21, 21-13, 16-21 से हराकर बाहर का रास्ता दिखा दिया.

2019 की चैंपियन, इस बार ‘फिनिशिंग लाइन’ पर चूकीं
2019 में स्वर्ण जीतकर विश्व चैंपियन बनीं सिंधु इस बार रिकॉर्ड छठे पदक की तलाश में थीं. उन्होंने 2013 और 2014 में कांस्य, 2017 और 2018 में रजत और 2019 में स्वर्ण पदक जीता था. लेकिन 64 मिनट तक चले इस संघर्ष में वह निर्णायक क्षणों पर लड़खड़ा गईं.

मैच का रोमांच, 59 शॉट्स की रैली
पहले गेम में सिंधु की गलतियों का फायदा उठाते हुए वर्दानी ने 21-14 से बढ़त बना ली. दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने शानदार वापसी की और 21-13 से जीत दर्ज कर मुकाबले को बराबरी पर ला दिया. निर्णायक गेम में शुरुआत से ही कांटे की टक्कर देखने को मिली. यहां 59 शॉट्स की लंबी रैली ने दर्शकों को रोमांचित किया, जिसे सिंधु ने अपने नाम किया. हालांकि वर्दानी ने संयम और सटीक शॉट्स के दम पर बढ़त कायम रखी और आखिरकार 21-16 से गेम और मैच दोनों जीत लिया.

चोटें और संघर्ष, पेरिस की राह कठिन
30 वर्षीय हैदराबाद की सिंधु पिछले दो वर्षों से चोटों, रैंकिंग में गिरावट और कोचिंग बदलावों से जूझ रही हैं. 2022 राष्ट्रमंडल खेलों के बाद से वह अपनी पुरानी लय हासिल नहीं कर पाई हैं. पेरिस ओलंपिक में तीसरा पदक उनका सपना है, लेकिन मौजूदा फॉर्म और लगातार हारें उनके लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं.

भारतीय मिश्रित युगल की भी हार
इसी टूर्नामेंट में भारतीय उम्मीदों को एक और झटका मिश्रित युगल में लगा. ध्रुव कपिला और तनिषा क्रास्टो की जोड़ी मलेशिया की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी चेन तांग जी और तोह ई वेई से 15-21, 13-21 से हारकर बाहर हो गई. इसके साथ ही भारत के पहले मिश्रित युगल पदक की उम्मीद भी खत्म हो गई.

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