हॉकी

0-2 से हारती टीम ने कैसे पलटा खेल? भारत ने अर्जेंटीना को 4-2 से हराकर दिखाया करिश्मा

अर्जेंटीना के खिलाफ 0–2 से पीछे होने के बाद भारत ने शानदार वापसी करते हुए 4–2 से जीत दर्ज की। चौथे क्वार्टर में मात्र नौ मिनट में चार गोल दागकर जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप के ब्रॉन्ज मैच में भारत की शुरुआत बेहद खराब रही. टीम 0–2 से पीछे थी और खेल में कहीं भी लय नजर नहीं आ रही थी. चेन्नई के मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की उम्मीदें भी कमजोर पड़ने लगी थीं. लेकिन जैसे ही चौथा क्वार्टर शुरू हुआ, भारतीय टीम अचानक पूरी तरह बदली हुई दिखी गति, इरादा और ऊर्जा सबकुछ अलग स्तर पर. अगले नौ मिनट में भारत ने चार गोल दागकर मैच को 4-2 से जीत लिया और 2016 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप में मेडल हासिल कर लिया.

अंकित पाल के गोल ने जगाई उम्मीद
भारत की वापसी 49वें मिनट में शुरू हुई, जब अंकित पाल ने अनमोल एक्का की ड्रैग-फ्लिक को शानदार तरीके से डिफ्लेक्ट कर गोल में बदल दिया. यह गोल जैसे पूरी टीम में जान डाल गया. अचानक पासिंग बेहतर होने लगी, स्ट्रक्चर सुधर गया और खिलाड़ी एक-दूसरे को समझकर खेलते दिखाई दिए. अर्जेंटीना पर दबाव बढ़ने लगा और भारत ने लगातार मौके बनाने शुरू कर दिए. दर्शकों के जोश ने भी टीम में नई ऊर्जा भर दी.

पेनल्टी कॉर्नर बने भारत का हथियार
हाल में पेनल्टी कॉर्नर भारत की कमजोरी रहे थे, लेकिन इस मैच में वही सबसे बड़ा हथियार बन गए. 52वें मिनट में अर्जेंटीना ने भारत को छठा पेनल्टी कॉर्नर दिया, और अनमोल ने जोरदार फ्लिक मारी जिसे मनमीत सिंह ने डिफ्लेक्ट कर स्कोर 2–2 कर दिया. इसके बाद 57वें मिनट में अर्जेंटीना के डिफेंडर ने अर्जदीप को सर्कल में रोक दिया, जिस पर भारत को पेनल्टी स्ट्रोक मिला. शारदानंद तिवारी ने बिना गलती के इसे गोल में बदल दिया और भारत पहली बार बढ़त में आया. एक मिनट बाद अर्जेंटीना ने कीपर को हटाया, लेकिन इस जोखिम का उल्टा नतीजा निकला भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला और अनमोल एक्का ने चौथा गोल कर दिया.

शुरुआत खराब, लेकिन गोलकीपर बनाया मैच
भारत का शुरुआती खेल काफी अव्यवस्थित था. तीसरे ही मिनट में अनमोल के फाउल से अर्जेंटीना को पेनल्टी स्ट्रोक मिला जिसे निकोलस रोड्रिगेज ने गोल में बदला. 44वें मिनट में सैंटियागो फर्नांडीज ने दूसरा गोल कर भारत पर दबाव दोगुना कर दिया. हालांकि, इसी दौरान भारत के गोलकीपर प्रिंसदीप सिंह ने कई शानदार बचाव किए, जिसने टीम को मैच में बनाए रखा. अगर उनकी सेव नहीं होतीं, तो भारत वापसी का मौका भी नहीं पाता. अंत में वही संयम, वही विश्वास और वही लड़ने का जज्बा भारत की ऐतिहासिक जीत का कारण बना.

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