हॉकी

स्टेडियम नहीं फिर भी जज्बा मजबूत, पहाड़ से उठी हॉकी की लहर ने रानीखेत को फिर दिलाया गौरव

बिना स्टेडियम के भी रानीखेत में हॉकी का जज्बा जिंदा है। ग्रामीण खिलाड़ियों की मेहनत और प्रशिक्षक की सोच से राष्ट्रीय स्तर तक चयन हुआ। पहाड़ से उठी इस लहर ने एक बार फिर खेल गौरव लौटाया।

आल इंडिया हॉकी टूर्नामेंट की मेजबानी कर चुकी रानीखेत नगरी में एक बार फिर राष्ट्रीय खेल का नवजागरण देखने को मिल रहा है। जहां कभी हॉकी की मजबूत पहचान थी, वहां आज भी बिना स्टेडियम के खिलाड़ी अपने सपनों को जिंदा रखे हुए हैं। नगर की प्रतिभाएं एनसीसी के साधारण और सुविधाविहीन मैदान में अभ्यास कर रही हैं और वहीं से राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही हैं। हाल ही में पांच खिलाड़ियों का चयन नेशनल स्कूल गेम्स के लिए हुआ और अब दो और खिलाड़ी नॉर्थ जोन अंतर विश्वविद्यालयी चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं। यह उपलब्धि साबित करती है कि संसाधन नहीं तो भी संकल्प हो, तो रास्ता बन ही जाता है।

ग्रामीण प्रतिभाओं ने थामी हॉकी की कमान
रानीखेत को उसका पुराना खेल गौरव लौटाने में शहर नहीं बल्कि आसपास के गांवों की प्रतिभाओं का बड़ा योगदान है। नगर के पास स्थित ऐरोड़ गांव के रहने वाले अनुज बिष्ट और हितेश सिंह मेहरा का चयन उत्तर भारत की अंतर विश्वविद्यालयी हॉकी चैंपियनशिप के लिए हुआ है। दोनों खिलाड़ी सोबन सिंह जीना अल्मोड़ा विश्वविद्यालय की टीम से खेलते नजर आएंगे। अनुज बीए प्रथम सेमेस्टर के छात्र हैं और उनके पिता रोडवेज स्टेशन पर छोटी दुकान चलाते हैं। वहीं हितेश के पिता मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद इन दोनों खिलाड़ियों ने खुद को साबित किया है।

प्रशिक्षक की सोच ने बदली तस्वीर
इन खिलाड़ियों की सफलता के पीछे प्रशिक्षक दीपक सिंह मेहरा की मेहनत और सोच अहम भूमिका निभा रही है। राष्ट्रीय खेल संस्थान से डिप्लोमा लेने के बाद दीपक सिंह मेहरा ने महानगरों में करियर बनाने की जगह पहाड़ लौटकर स्थानीय बच्चों को हॉकी सिखाने का फैसला किया। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण शिविरों से सीखे अनुभव को उन्होंने गांव के बच्चों तक पहुंचाया। साधारण और ऊबड़खाबड़ मैदान में हॉकी का ककहरा सिखाकर उन्होंने अब तक अंडर चौदह और अंडर उन्नीस वर्ग में कई खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है।

आगे बढ़ते कदम और भविष्य की उम्मीद
प्रशिक्षक दीपक सिंह मेहरा का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ खिलाड़ी तैयार करना नहीं बल्कि राष्ट्रीय खेल और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देना है। इसके लिए भविष्य में और भी खेल कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मंच मिल सके। इससे पहले इसी प्रशिक्षण शिविर से गौरव मेहरा योगेश मेहरा आदित्य मेहरा हर्षित मेहरा गोकुल मेहरा सौरव मेहरा नवनीत मेहरा पारस नेगी दिक्षांत मेहरा ईशांत मेहरा करण नेगी नैतिक मेहरा और निकिता मेहरा जैसे खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। रानीखेत की यह कहानी बताती है कि अगर नीयत मजबूत हो तो पहाड़ से भी देश का भविष्य निकल सकता है।

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