
अफ्रीका के सामने सूर्या और गिल दोनों फ्लॉप, वर्ल्ड कप से पहले बढ़ी फैंस की टेंशन, गंभीर की रणनीति पर सवाल तेज
कप्तान सूर्यकुमार यादव और उपकप्तान शुभमन गिल एक बार फिर टीम की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके.
साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टी20 में भारतीय टीम का टॉप ऑर्डर पूरी तरह बिखर गया. कप्तान सूर्यकुमार यादव और उपकप्तान शुभमन गिल एक बार फिर टीम की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके. न्यू चंडीगढ़ में खेले गए मुकाबले में शुभमन गिल पहली ही गेंद पर आउट होकर चलते बने, वहीं सूर्यकुमार महज कुछ रन जोड़कर पवेलियन लौट गए. यह सिलसिला पिछले कई मैचों से लगातार बना हुआ है, जिसने टीम मैनेजमेंट और फैंस दोनों की चिंता बढ़ा दी है. दोनों खिलाड़ियों को टीम इंडिया की रीढ़ माना जाता है, लेकिन हालिया फॉर्म ने टीम के संतुलन को कमजोर कर दिया है.
सूर्या की कमजोर फॉर्म से बढ़ी कप्तानी की मुश्किल
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ टी20 बल्लेबाजों में शुमार सूर्यकुमार यादव पिछले लंबे समय से रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. पिछले 20 मैचों में उनके बल्ले से केवल 227 रन आए हैं. उनका औसत 14 से भी कम और स्ट्राइक रेट 120 के आसपास है, जो उनकी क्षमता के बिल्कुल विपरीत है. इन 20 पारियों में सूर्या केवल दो बार 30 के पार पहुंचे हैं, जबकि कई बार छोटे स्कोर पर आउट हुए. एक कप्तान के रूप में टीम में भरोसा जगाने की जिम्मेदारी उन पर होती है, लेकिन लगातार खराब प्रदर्शन टीम की बल्लेबाजी को कमजोर कर रहा है और दबाव बढ़ा रहा है.
गिल की फ्लॉप सीरीज से बढ़ी चयन पर बहस
शुभमन गिल को टी20 फॉर्मेट में लगातार मौके दिए जा रहे हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा. टेस्ट और वनडे में शानदार रिकॉर्ड रखने वाले गिल इस फॉर्मेट में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं. पिछली 14 टी20 पारियों में वे औसत दर्जे के आंकड़ों से ही रन बना पाए हैं और इस वर्ष उनके नाम एक भी पचासा नहीं है. न्यू चंडीगढ़ में करियर का पहला गोल्डन डक देखने के बाद आलोचना और बढ़ गई है. महत्वपूर्ण बात यह है कि गिल की जगह संजू सैमसन और यशस्वी जायसवाल जैसे फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी बाहर बैठे हैं, जिससे चयन नीति पर सवाल उठ रहे हैं.
वर्ल्ड कप की तैयारी पर बढ़ा दबाव
टी20 वर्ल्ड कप करीब है और ऐसे समय में शीर्ष क्रम का लगातार फेल होना Sटीम के अभियान के लिए खतरे की घंटी है. क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की शुरुआत फिलहाल सबसे कमजोर कड़ी बन गई है, जिससे बाकी बल्लेबाजी पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. टीम मैनेजमेंट के सामने अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अनुभवी खिलाड़ियों को और मौके दिए जाएं या फॉर्म में मौजूद खिलाड़ियों को प्राथमिकता मिले. आने वाले मैच यह तय करेंगे कि भारतीय टीम अपने टॉप ऑर्डर में क्या बदलाव करती है, क्योंकि वर्ल्ड कप से पहले मजबूत संयोजन बनाना बेहद जरूरी है.




