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भारतीय हॉकी के दिग्गज सरदार सिंह ने खिलाड़ी से कोच बनने के सफर पर खुलकर बात की, जानिए क्या कुछ कहा ?

भारतीय हॉकी आइकन सरदार सिंह ने संन्यास के बाद कोचिंग सफर पर खुलकर बात की। खिलाड़ी से मेंटर बनने की भावनात्मक चुनौतियों, टीम-प्रबंधन की जिम्मेदारियों और भारतीय हॉकी के सामूहिक खेल की अहमियत पर अपने अनुभव साझा किए।

भारतीय हॉकी के दिग्गज सरदार सिंह भले ही ओलंपिक पदक न जीत पाए हों, लेकिन उनका कद और सम्मान किसी से कम नहीं है। 21 साल की उम्र में भारत की कप्तानी संभालने वाले सबसे युवा खिलाड़ी रहे सरदार के लिए संन्यास आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट के बाद लंबे समय तक वह इंटरनेशनल मैच नहीं देख पाए। 12–15 साल तक तिरंगा पहनकर मैदान पर खेलने के बाद अचानक बाहर बैठना भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि यह सफर हर खिलाड़ी को तय करना होता है।

कोचिंग में मिली नई चुनौती
सरदार सिंह कोच और मेंटर के रूप में खुद को दोबारा साबित कर रहे हैं। पिछले आठ सालों से वह इंडिया ए, अंडर-17, अंडर-18 टीमों के साथ काम कर चुके हैं और फिलहाल हॉकी इंडिया लीग की टीम सूरमा हॉकी क्लब के मेंटर हैं। उनका मानना है कि खिलाड़ी रहते हुए मैदान पर चीजें आपके कंट्रोल में होती हैं, लेकिन कोच बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती टीम को एकजुट रखना होती है। सीमित समय के कैंप में दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ निकालना ही उनकी असली जिम्मेदारी है।

टीम ही असली स्टार है
मौजूदा भारतीय टीम के पसंदीदा खिलाड़ियों पर सवाल पूछे जाने पर सरदार ने किसी एक नाम को आगे नहीं रखा। उनका साफ कहना है कि आधुनिक हॉकी में टूर्नामेंट जीतने के लिए 16–20 खिलाड़ियों का सामूहिक प्रदर्शन जरूरी है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हार्दिक सिंह मिडफील्ड में मजबूत हैं, सुखजीत सिंह फॉरवर्ड लाइन में असरदार हैं और कप्तान हरमनप्रीत सिंह दबाव के समय गोल करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने भारतीय फॉरवर्ड लाइन की तारीफ करते हुए कहा कि अब पहला डिफेंस वहीं से शुरू होता है।

सूरमा की तैयारी और आगे की राह
आगामी हॉकी इंडिया लीग सीजन के लिए सूरमा हॉकी क्लब ने बेल्जियम के ओलंपियन फिलिप गोल्डबर्ग को नया हेड कोच नियुक्त किया है। सरदार सिंह के मुताबिक नए कोच के साथ रणनीति पर लगातार बातचीत हो रही है। टीम और खिलाड़ियों के साथ बैठकर यह तय किया जाएगा कि किससे बेहतर प्रदर्शन निकल सकता है। उन्होंने बताया कि सूरमा के कई खिलाड़ी इस वक्त भारत के लिए खेल रहे हैं, जो क्लब के लिए गर्व की बात है। सरदार मानते हैं कि कोचिंग उनके जीवन का नया इम्तिहान है और वह इसे पूरे समर्पण के साथ निभाने के लिए तैयार हैं।

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