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क्या हॉकी इंडिया लीग से निकलेगा भारत का अगला बड़ा कोच, विदेशी दिग्गजों के साथ सीख रहे देसी प्रशिक्षक ?

हॉकी इंडिया लीग अब देसी कोचों के लिए भी बड़ा लर्निंग प्लेटफॉर्म बन रही है। विदेशी दिग्गजों के साथ काम कर भारतीय प्रशिक्षक अंतरराष्ट्रीय कोचिंग स्ट्रक्चर सीख रहे हैं, जो भविष्य में भारत को नया बड़ा कोच दे सकता है।

हॉकी इंडिया लीग अब सिर्फ युवा भारतीय खिलाड़ियों के लिए ही नहीं बल्कि देसी कोचों के लिए भी एक बड़ा सीखने का मंच बनकर उभर रही है। मौजूदा HIL सीजन में कई भारतीय कोच अलग अलग टीमों के साथ काम कर रहे हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की टीमें कैसे चलती हैं। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी विक्रम पिल्लै, विक्रम कंथ, एन मुथुकुमार और एम गुनशेखर जैसे नाम विदेशी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के साथ काम कर रहे हैं। इस लीग में इस समय रांची रॉयल्स के हरेंद्र सिंह अकेले ऐसे भारतीय कोच हैं जो मुख्य कोच की भूमिका निभा रहे हैं।

विक्रम पिल्लै और कंथ के लिए सीखने का सुनहरा मौका
HIL GC के हेड कोच विक्रम पिल्लै मानते हैं कि यह अनुभव उनके लिए बेहद खास है। एक खिलाड़ी के तौर पर HIL खेलने और अब एक कोच के तौर पर टीम संभालने में बड़ा फर्क है। महाराष्ट्र की डेवलपमेंट टीम के साथ काम करने के बाद HIL में कोचिंग करना उन्हें अलग संस्कृतियों को समझने और ज्ञान का आदान प्रदान करने का मौका दे रहा है। वहीं तमिलनाडु ड्रैगन्स की टीम में विदेशी कोच टिम व्हाइट के सहायक बने विक्रम कंथ के लिए यह पहली बार है जब वह इतने बड़े मंच पर कोचिंग कर रहे हैं। कंथ का कहना है कि कम समय में अलग पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को तैयार करना उन्होंने यहीं सीखा।

विदेशी कोचों से सीखकर मजबूत हो रहे देसी प्रशिक्षक
विक्रम कंथ के मुताबिक विदेशी कोचों के साथ काम करने से मैच के हालात में खिलाड़ियों को बेहतर समझने की क्षमता बढ़ती है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी कोचों का स्ट्रक्चर अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसा होता है और उससे भारतीय कोचों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। भाषा की दिक्कत को कम करने में भारतीय कोच घरेलू खिलाड़ियों और विदेशी स्टाफ के बीच सेतु का काम करते हैं। यही वजह है कि HIL को भारतीय कोचिंग सिस्टम के लिए एक जरूरी कड़ी माना जा रहा है।

ग्राउंड लेवल तक पहुंचेगा HIL का फायदा
हॉकी इंडिया के कोषाध्यक्ष शेखर मनोहरन का मानना है कि भारतीय कोचों को लगातार अपग्रेड करना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में विदेशी कोचों पर निर्भरता कम हो। तमिलनाडु हॉकी यूनिट के अध्यक्ष के रूप में वह चाहते हैं कि HIL में काम कर रहे राज्य के कोच यह ज्ञान जमीनी स्तर तक पहुंचाएं। स्कूल हॉकी लीग और कोचिंग क्लिनिक के जरिए यह अनुभव बच्चों और पीईटी शिक्षकों तक ले जाने की योजना है। उम्मीद है कि हॉकी इंडिया लीग से निकली यह सीख आने वाले समय में भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

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