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WTC में भारत की मुश्किलें बढ़ीं. साउथ अफ्रीका से हार का खतरा और हर अंक की जंग शुरू

WTC में भारत की स्थिति मुश्किल होती जा रही है। पहला टेस्ट हारने के बाद अब दूसरे मैच में भी खतरा बढ़ गया है। भारत को फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए हर मैच और हर अंक अब फाइनल जैसा खेलना होगा।

भारत और साउथ अफ्रीका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज चल रही है. कोलकाता में खेला गया पहला टेस्ट भारत हार चुका है. अब दूसरे मुकाबले में भी टीम इंडिया पर हार का खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में मिलने वाले अंक और भी ज्यादा अहम हो गए हैं.

साउथ अफ्रीका ने दिखाई चैंपियन वाली ताकत
साउथ अफ्रीका मौजूदा टेस्ट चैंपियन है और उसने अपने खेल से साबित कर दिया कि वो खिताब यूं ही नहीं जीता था. इंडिया की कमजोर शुरुआत ने WTC फाइनल की राह और मुश्किल कर दी है.

अंक कैसे मिलते हैं. जान लीजिए पूरा सिस्टम
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में हर मैच का नतीजा प्वाइंट्स टेबल को सीधे प्रभावित करता है. 2025 से 2027 का पूरा चक्र चल रहा है और इसका फाइनल 2027 में खेला जाएगा. इस दौरान भारत का इंग्लैंड दौरा और ऑस्ट्रेलिया में एशेज जैसी कई रोमांचक सीरीज भी शामिल हैं.

जीत. ड्रॉ. टाई. कितना मिलता है
आईसीसी ने टेस्ट मैचों के लिए प्वाइंट्स का साफ फॉर्मूला तय किया है.
जीत पर 12 पॉइंट्स मिलते हैं.
ड्रॉ होने पर दोनों टीमों को 4 पॉइंट्स दिए जाते हैं.
टाई होने की स्थिति में दोनों टीमों को 6 पॉइंट्स मिलते हैं.

ओवर रेट पर भी होती है कटौती
हर टीम को टेस्ट मैच में तय ओवर रेट बनाए रखना होता है. अगर कोई टीम पीछे रह जाती है तो जितने ओवर कम हुए. उतने पॉइंट्स सीधे काट लिए जाते हैं. इससे टीम की स्थिति पर बड़ा असर पड़ता है.

प्रतिशत पॉइंट्स से तय होती रैंकिंग
भले ही एक टीम ज्यादा मैच खेले या कम. WTC की रैंकिंग प्रतिशत पॉइंट्स यानी POP से तय होती है. टीम ने जितने पॉइंट्स हासिल किए हैं. उन्हें कुल संभावित पॉइंट्स से भाग दिया जाता है और इसी आधार पर टेबल में उनकी जगह तय होती है.

भारत के लिए अब हर मैच फाइनल जैसा
भारतीय टीम पहले टेस्ट की हार के बाद दबाव में है. WTC फाइनल की राह बनाए रखनी है तो अब हर मैच में बेहतर खेल दिखाना होगा. हर एक अंक आने वाले दो साल में टीम इंडिया का भाग्य तय करेगा.

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