
‘गंभीर के गुस्से की कीमत करियर ने चुकाई’, मनोज तिवारी ने खोले पुराने विवादों के चौंकाने वाले राज, पढ़ें
मनोज तिवारी ने गौतम गंभीर के साथ पुराने विवादों का खुलासा किया। KKR और रणजी ट्रॉफी के दौरान हुए टकरावों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि गंभीर के गुस्से की कीमत उनके करियर ने चुकाई।
क्रिकेट में खिलाड़ी और कोच के बीच मतभेद नई बात नहीं है, लेकिन जब मामला बड़े नामों से जुड़ा हो तो चर्चा तेज हो जाती है। टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच Gautam Gambhir हाल के दिनों में सीनियर खिलाड़ियों से मतभेद को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर Manoj Tiwary ने गंभीर के साथ अपने रिश्तों को लेकर पुराने जख्म फिर हरे कर दिए हैं। तिवारी का दावा है कि गंभीर के साथ उनकी खटास सिर्फ निजी नहीं रही, बल्कि इसका सीधा असर उनके क्रिकेट करियर पर भी पड़ा। उनके मुताबिक, यह सब अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसकी शुरुआत आईपीएल के दिनों में ही हो गई थी।
KKR में कप्तान से टकराव
मनोज तिवारी और गौतम गंभीर दोनों ने Kolkata Knight Riders के लिए साथ खेला था, जहां गंभीर कप्तान थे। तिवारी का आरोप है कि अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें जानबूझकर बैटिंग ऑर्डर में नीचे भेजा गया। उन्होंने मीडिया में खुलासा किया कि एक मैच के बाद Eden Gardens में गंभीर ने उनका कॉलर पकड़कर गुस्से में धमकी दी थी। हालात इतने बिगड़ गए कि टीम के बॉलिंग कोच Wasim Akram को बीच में आकर मामला शांत कराना पड़ा। मनोज तिवारी का मानना है कि यही घटना उनके KKR करियर के समय से पहले खत्म होने की बड़ी वजह बनी, क्योंकि इसके कुछ समय बाद ही फ्रेंचाइजी ने उन्हें रिलीज कर दिया।
रणजी ट्रॉफी में फिर भड़का विवाद
KKR के बाद गंभीर और तिवारी का टकराव घरेलू क्रिकेट में भी देखने को मिला। साल 2015 में Ranji Trophy के एक मुकाबले में दिल्ली और बंगाल आमने-सामने थे। यह मैच दिल्ली के Feroz Shah Kotla में खेला जा रहा था। उस समय मनोज तिवारी बल्लेबाजी कर रहे थे और उन्होंने सुरक्षा के लिए डगआउट से हेलमेट मंगवाया। बताया जाता है कि गौतम गंभीर को यह बात पसंद नहीं आई और उन्होंने कथित तौर पर तिवारी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। मामला इतना बढ़ गया कि अंपायर को बीच में आकर दखल देना पड़ा, ताकि खेल दोबारा सामान्य तरीके से चल सके।
करियर पर पड़ा गहरा असर
मनोज तिवारी का मानना है कि इन लगातार विवादों ने उनके आईपीएल और टीम इंडिया दोनों के करियर को नुकसान पहुंचाया। उनके मुताबिक, गंभीर की आक्रामक सोच और गुस्सैल रवैये के चलते टीम के माहौल पर असर पड़ा और युवा खिलाड़ियों के लिए मौके सीमित हो गए। तिवारी का दावा है कि प्रतिभा होने के बावजूद उन्हें वह समर्थन नहीं मिला, जिसकी एक खिलाड़ी को जरूरत होती है। आज जब गौतम गंभीर टीम इंडिया के कोच के रूप में फैसले ले रहे हैं, तब मनोज तिवारी की ये बातें एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि मैदान के बाहर के रिश्ते किसी खिलाड़ी के करियर को कितनी गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।
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