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एक भी हार नहीं फिर भी खिताब दूर, अजीब नियम बना कोनेरू हम्पी की सबसे बड़ी बाधा

FIDE वर्ल्ड रैपिड चेस 2025 में कोनेरू हम्पी बिना एक भी मैच हारे संयुक्त टॉप पर रहीं, लेकिन नए नियम के कारण टाईब्रेक से बाहर हो गईं। खिताब से दूर रहना उनके लिए बेहद निराशाजनक रहा।

भारत की दिग्गज शतरंज खिलाड़ी कोनेरू हम्पी एक बार फिर खिताब के बेहद करीब पहुंचकर चूक गईं। कतर की राजधानी दोहा में आयोजित FIDE वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप 2025 में हम्पी ने शानदार खेल दिखाया। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने एक भी मुकाबला नहीं गंवाया। इसके बावजूद वह चैंपियन नहीं बन सकीं। इससे पहले जुलाई 2025 में भी उन्हें FIDE महिला वर्ल्ड कप फाइनल में दिव्या देशमुख से हार का सामना करना पड़ा था। पांच महीने के भीतर दूसरी बार खिताब हाथ से निकलना हम्पी के लिए बेहद निराशाजनक रहा।

आखिरी राउंड में फिसला मौका
टूर्नामेंट के 11वें और आखिरी राउंड में हम्पी का सामना भारतीय खिलाड़ी सविता श्री बी से हुआ। यह मुकाबला जीतते ही हम्पी खिताब अपने नाम कर सकती थीं। उस समय झू जिनर और एलेक्जेंड्रा अपने अपने मैच ड्रॉ करा चुकी थीं। हम्पी मजबूत स्थिति में थीं लेकिन गेम ड्रॉ रहा। इस ड्रॉ के बाद हम्पी जिनर और एलेक्जेंड्रा के साथ संयुक्त रूप से टॉप पर पहुंच गईं। तीनों के 11 राउंड के बाद 8.5 अंक रहे। आमतौर पर ऐसी स्थिति में टाईब्रेक से विजेता तय किया जाता है लेकिन यहां कहानी बदल गई।

अजीब नियम बना बाधा
FIDE ने सितंबर 2025 में वर्ल्ड रैपिड और ब्लिट्ज चैंपियनशिप के लिए नया नियम लागू किया था। इस नियम के अनुसार महिला वर्ग में पहले स्थान के लिए टाई होने पर सिर्फ दो खिलाड़ी ही टाईब्रेक खेल सकती हैं। ओपन वर्ग में सभी खिलाड़ियों को मौका मिलता है लेकिन महिला वर्ग में यह सीमा तय है। हम्पी टॉप पर होने के बावजूद रैंकिंग में तीसरे स्थान पर रहीं। इसी वजह से उन्हें टाईब्रेक खेलने का मौका नहीं मिला और वह सीधे बाहर हो गईं। अगर यह ओपन कैटेगरी होती तो हम्पी टाईब्रेक खेल सकती थीं।

पहले भी झेल चुकी हैं दर्द
कोनेरू हम्पी दो बार वर्ल्ड रैपिड चैंपियन रह चुकी हैं। उन्होंने 2019 में मास्को और 2024 में न्यूयॉर्क में यह खिताब जीता था। हालांकि 2023 में भी वह संयुक्त रूप से टॉप पर रहने के बावजूद टाईब्रेक में हार गई थीं। इस बार तो बिना हारे ही उन्हें ब्रॉन्ज से संतोष करना पड़ा। नियमों के चलते खिताब से दूर रहना हम्पी के करियर के सबसे निराशाजनक पलों में से एक माना जा रहा है। फिर भी उनका प्रदर्शन यह दिखाता है कि वह आज भी विश्व शतरंज की सबसे मजबूत खिलाड़ियों में शामिल हैं।

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