
एक साल दो कहानियां, दिव्या देशमुख ने रचा इतिहास, वर्ल्ड चैंपियन गुकेश के लिए क्यों फीका रहा 2025
साल 2025 भारतीय शतरंज के लिए विरोधाभासों से भरा रहा। दिव्या देशमुख ने वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा, जबकि मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश बड़े टूर्नामेंट्स में उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके।
साल 2025 का जुलाई महीना भारतीय शतरंज के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। जॉर्जिया के बाटुमी में हुए FIDE महिला वर्ल्ड कप के फाइनल में दो भारतीय खिलाड़ी आमने सामने थीं। दिव्या देशमुख और कोनेरू हम्पी। यह पहला मौका था जब FIDE महिला वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत की दो खिलाड़ी पहुंचीं। 19 साल की दिव्या ने अनुभवी हम्पी को हराकर खिताब जीत लिया और ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। इस जीत ने न सिर्फ नया इतिहास रचा बल्कि भारतीय महिला शतरंज को नई पहचान भी दी।
दिव्या का सुनहरा साल
2025 पूरी तरह दिव्या देशमुख के नाम रहा। वर्ल्ड कप जीतने के साथ उन्होंने ग्रैंडमास्टर का प्रतिष्ठित खिताब भी हासिल किया। इसके अलावा दिव्या ने 2026 कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई कर लिया। इस टूर्नामेंट की विजेता को मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन जू वेंजुन को चुनौती देने का मौका मिलेगा। दिव्या की इस अप्रत्याशित सफलता से महिला शतरंज में नई ऊर्जा आई। अब तक भारत में महिला शतरंज की जिम्मेदारी कोनेरू हम्पी और द्रोणवल्ली हरिका जैसे दिग्गजों पर थी जो करीब दो दशक से देश का प्रतिनिधित्व कर रही थीं।
गुकेश के लिए उतार चढ़ाव भरा साल
जहां दिव्या ने ऊंचाइयां छुईं वहीं वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश के लिए 2025 उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। पिछले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रचने वाले गुकेश इस साल कई अहम टूर्नामेंट में नाकाम रहे। टाटा स्टील मास्टर्स में ब्लिट्ज टाई ब्रेकर में उन्हें आर प्रज्ञानानंदा से हार मिली। फ्रीस्टाइल चेस ग्रैंडस्लैम और FIDE ग्रैंड स्विस में भी वह प्रभावित नहीं कर सके। गोवा में हुए वर्ल्ड कप में वह तीसरे दौर में बाहर हो गए। हालांकि उन्होंने नॉर्वे चेस में मैग्नस कार्लसन को हराया और यूरोपीय क्लब कप में व्यक्तिगत और टीम खिताब जरूर जीते।
भारतीय शतरंज की बढ़ती ताकत
2025 में भारतीय शतरंज की गहराई भी साफ नजर आई। गोवा में हुए वर्ल्ड कप में कई भारतीय दावेदार घरेलू फायदा नहीं उठा सके लेकिन प्रज्ञानानंदा ने FIDE सर्किट 2025 जीतकर कैंडिडेट्स 2026 में जगह बना ली। वह रैंकिंग के जरिए कैंडिडेट्स में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष बने। विश्वनाथन आनंद के 1988 में पहले भारतीय ग्रैंडमास्टर बनने के बाद अब देश में 91 ग्रैंडमास्टर हो चुके हैं। इस साल दिव्या देशमुख समेत छह नए नाम इस सूची में जुड़े जिसने दिखा दिया कि भारतीय शतरंज का भविष्य पहले से ज्यादा मजबूत है।
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