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उन्नति की उड़ान थमी, लेकिन चमक बिखेर गई: चीन ओपन में दिखी भारत की नई बैडमिंटन स्टार

17 वर्षीय उन्नति हुड्डा ने चीन ओपन सुपर 1000 में पीवी सिंधु को हराकर सबका ध्यान खींचा. क्वार्टर फाइनल में यामागुची से हारकर बाहर हुईं, लेकिन भारतीय बैडमिंटन में नई उम्मीद बनकर उभरीं.

भारत की 17 वर्षीय उभरती बैडमिंटन स्टार उन्नति हुड्डा का चाइना ओपन सुपर 1000 में शानदार अभियान क्वार्टर फाइनल में समाप्त हो गया. शुक्रवार, 25 जुलाई को खेले गए मुकाबले में उन्हें जापान की दिग्गज और विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर काबिज अकाने यामागुची के खिलाफ सीधे गेमों में 16-21, 12-21 से हार का सामना करना पड़ा. महज़ 33 मिनट चले इस मैच में उन्नति ने शुरुआत में दमदार चुनौती दी, लेकिन यामागुची के अनुभव और सटीक शॉट्स के आगे टिक नहीं सकीं.

पीवी सिंधु पर जीत बनी करियर का टर्निंग पॉइंट
हालांकि हार के बावजूद, यह टूर्नामेंट उन्नति के करियर का अहम मोड़ बनकर सामने आया. 24 जुलाई को उन्होंने बैडमिंटन की दिग्गज और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु को प्री-क्वार्टर फाइनल में 21-16, 19-21, 21-13 से हराकर सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी. यह सिर्फ एक उलटफेर नहीं, बल्कि भारतीय बैडमिंटन में एक नए युग की दस्तक थी.

इतिहास रचने वाली चौथी भारतीय महिला खिलाड़ी
उन्नति हुड्डा ने इस टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर एक खास उपलब्धि भी हासिल की. वह BWF सुपर 1000 टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली सिर्फ चौथी भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं. उनसे पहले यह मुकाम साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और मालविका बंसोड़ को मिला है.

मैच में सीखी गई अहम सीख
क्वार्टर फाइनल में यामागुची के खिलाफ पहले गेम में उन्नति ने बराबरी की टक्कर दी, लेकिन गेम के मध्य में पांच लगातार अंक देकर लय गंवा दी. दूसरे गेम में भी कुछ देर के लिए वापसी की कोशिश की, लेकिन यामागुची ने छह अंक की लकीर खींचकर मुकाबला समाप्त कर दिया. मैच के बाद उन्नति ने कहा, “मुझे उनके खिलाफ और ज्यादा धैर्य रखना होगा. पॉइंट खत्म करने की जल्दी नुकसानदायक हो सकती है.”

अब निगाहें चिराग-सात्विक की जोड़ी पर
भारत की नजरें अब सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी पर टिकी हैं, जो क्वार्टर फाइनल में मलेशिया की यू सिन ओंग और ई यी तेओ के खिलाफ कोर्ट में उतरेंगे.

उन्नति हुड्डा भले ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई हों, लेकिन उन्होंने अपने खेल से यह साफ कर दिया है कि भविष्य में भारतीय बैडमिंटन को एक नई लीडर मिलने वाली है.