हॉकी

100 साल का हॉकी सफर. जब ध्यानचंद से लेकर टोक्यो तक गूंजा भारत का नाम

भारतीय हॉकी ने 1925 से 2025 तक 100 साल का सुनहरा सफर तय किया है. ध्यानचंद से लेकर हरमनप्रीत तक, भारत ने 8 ओलंपिक गोल्ड और 1 वर्ल्ड कप जीतकर हॉकी को देश की पहचान बना दिया.

भारत में हॉकी की शुरुआत साल 1925 में हुई थी, जब ग्वालियर में इंडियन हॉकी फेडरेशन (IHF) की स्थापना की गई. अगले ही साल भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड का दौरा किया, जहां ध्यानचंद ने पहली बार अपनी पहचान बनाई. यही से शुरू हुआ वो सुनहरा सफर, जिसने भारत को हॉकी की ताकत बना दिया.

1928 से 1936 तक स्वर्णिम युग
1928 में एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारत ने नीदरलैंड को 3-0 से हराकर पहला गोल्ड मेडल जीता. खास बात यह रही कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं खाया. इसके बाद 1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत ने अमेरिका को 24-1 से हराया. इस मैच में ध्यानचंद ने 8 और रूप सिंह ने 10 गोल दागे. 1936 में बर्लिन ओलंपिक में भारत ने जर्मनी को 8-1 से हराकर गोल्ड मेडल की हैट्रिक लगाई.

आज़ादी के बाद की गौरवगाथा
1948 लंदन ओलंपिक भारत के लिए भावनात्मक पल था. आज़ादी के एक साल बाद टीम इंडिया ने ब्रिटेन को 4-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीता. इसके बाद 1952 हेलसिंकी ओलंपिक में भारत ने नीदरलैंड को 6-1 से हराकर लगातार पांचवां गोल्ड जीता. इस मुकाबले में बलबीर सिंह सीनियर ने अकेले 5 गोल किए.

भारत-पाकिस्तान की क्लासिक भिड़ंतें
1956 मेलबर्न ओलंपिक में भारत और पाकिस्तान पहली बार आमने-सामने आए. रोमांचक फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 1-0 से हराकर लगातार छठा गोल्ड अपने नाम किया. 1960 में मिली हार का बदला भारत ने 1964 टोक्यो ओलंपिक में लिया और पाकिस्तान को 1-0 से हराकर सातवां गोल्ड जीत लिया.

1975 में वर्ल्ड कप चैंपियन बना भारत
ओलंपिक के बाद भारत ने वर्ल्ड कप में भी अपनी बादशाहत साबित की. 1975 में कुआलालंपुर में भारत ने पाकिस्तान को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप जीता. यह जीत आज भी भारतीय हॉकी के इतिहास का स्वर्ण अध्याय मानी जाती है.

1980 से टोक्यो तक की जद्दोजहद
1980 मॉस्को ओलंपिक में भारत ने स्पेन को 4-3 से हराकर अपना आठवां गोल्ड मेडल जीता. इसके बाद 41 साल तक भारत ओलंपिक में गोल्ड नहीं जीत सका. लेकिन 2021 टोक्यो ओलंपिक में टीम इंडिया ने जर्मनी को 5-4 से हराकर ब्रॉन्ज जीता. वहीं 2024 पेरिस ओलंपिक में भी भारत ने कांस्य पदक अपने नाम किया.

एक सदी बाद भी जारी है हॉकी का जुनून
1925 में शुरू हुई इस यात्रा ने भारत को 13 ओलंपिक मेडल दिलाए. ध्यानचंद से लेकर हरमनप्रीत तक, भारतीय हॉकी ने साबित किया है कि यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि देश की पहचान है. 100 साल बाद भी भारतीय हॉकी का यह जुनून और गौरव जारी है.

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