
आईएसएल 2025-26 पर बड़ा संकट, होम-अवे फॉर्मेट खत्म, खतरे में एशियाई टूर्नामेंट, फंडिंग और भविष्य पर उठे ये सवाल
आईएसएल 2025-26 बड़े संकट से गुजर रहा है। होम-अवे फॉर्मेट खत्म कर सेंट्रल वेन्यू मॉडल अपनाया जाएगा। फंडिंग की अनिश्चितता और नए कमर्शियल पार्टनर की कमी से लीग का भविष्य और एशियाई टूर्नामेंट में भारत की भागीदारी खतरे में है।
इंडियन सुपर लीग के 2025-26 सीजन को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। एआईएफएफ और आईएसएल क्लबों की बैठक में तय हुआ कि इस बार लीग होम एंड अवे फॉर्मेट में नहीं खेली जाएगी। इसके बजाय मुकाबले दो या तीन केंद्रीय वेन्यू पर कराए जाएंगे। आमतौर पर सितंबर से शुरू होने वाली आईएसएल इस बार फरवरी के आसपास शुरू होने की संभावना थी लेकिन अब तारीखें भी तय नहीं हो पाई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह मास्टर राइट्स एग्रीमेंट का खत्म होना और नया कमर्शियल पार्टनर न मिल पाना है। इस अनिश्चितता ने लीग के पूरे ढांचे को हिला दिया है।
सबसे बड़ा सवाल फंडिंग का
इस सीजन आईएसएल को कौन फंड करेगा, यही सबसे अहम सवाल बनकर सामने आया है। क्लबों ने साफ तौर पर एआईएफएफ से पूछा है कि अगर कोई कमर्शियल पार्टनर नहीं मिलता तो क्या फेडरेशन खुद लीग को फंड कर पाएगी। क्लब इस बात की गारंटी चाहते हैं कि लीग बीच में वित्तीय संकट में न फंस जाए। क्योंकि अभी तक टेंडर प्रक्रिया में किसी भी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई है। ऐसे में क्लबों के लिए जोखिम बढ़ गया है और वे अपने निवेश को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
एशियाई टूर्नामेंट पर संकट
आईएसएल के इस बदले फॉर्मेट का असर एएफसी प्रतियोगिताओं पर भी पड़ सकता है। भारत के पास एएफसी चैंपियंस लीग टू के लिए दो स्लॉट हैं लेकिन एएफसी के नियमों के मुताबिक एक टीम को सीजन में कम से कम 24 मैच खेलने होते हैं और लीग का समय आठ महीने का होना चाहिए। नए मॉडल में आईएसएल शील्ड जीतने वाली टीम सिर्फ 15 मैच खेलेगी। ऐसे में भारतीय क्लब एएफसी के लिए अयोग्य भी ठहराए जा सकते हैं। एआईएफएफ अब एएफसी से विशेष परिस्थितियों का हवाला देकर इन स्लॉट्स को बचाने की कोशिश करेगा।
आगे क्या होगा आईएसएल का
एआईएफएफ ने क्लबों को भरोसा दिलाया है कि रविवार की बैठक में उठे सभी मुद्दों पर जल्द अपडेट दिया जाएगा। संभावित वेन्यू पर भी चर्चा की जाएगी। इसके अलावा एआईएफएफ और आईएसएल क्लबों के बीच एक फिजिकल मीटिंग बुलाई गई है, जिसमें 2026-27 से लागू होने वाले लंबे समय के प्लान पर बात होगी। इसमें सैलरी कैप, ऑपरेशनल खर्च और निवेश की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। फिलहाल इतना तय है कि आईएसएल 2025-26 एक ट्रांजिशन सीजन होगा, जिसका भविष्य कई सवालों के घेरे में है।
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