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एशिया कप से पहले भरोसे का बड़ा दांव, क्या इस बार भारतीय महिला टीम रचेगी इतिहास

Crispin Chettri को एएफसी महिला एशियन कप से पहले भारतीय महिला टीम पर पूरा भरोसा है। कठिन ग्रुप के बावजूद उनका मानना है कि भारत नॉकआउट तक पहुंच सकता है और इतिहास रच सकता है।

भारतीय महिला फुटबॉल टीम के मुख्य कोच क्रिस्पिन चेत्री को आने वाले एएफसी महिला एशियन कप में अपनी टीम से बड़ी उम्मीदें हैं। उनका साफ मानना है कि कठिन ग्रुप के बावजूद भारतीय टीम नॉकआउट चरण तक पहुंच सकती है। इसी भरोसे के साथ उन्होंने लक्ष्य तय कर लिया है और खिलाड़ियों में भी वही सोच भरने में जुटे हैं। कोच का मानना है कि अगर टीम ने खुद पर भरोसा रखा तो बड़े सपने भी हकीकत बन सकते हैं। यही वजह है कि वह अभी से भविष्य की तस्वीर देखने लगे हैं और विश्व कप तक पहुंचने की कल्पना कर रहे हैं।

तुर्किये से ऑस्ट्रेलिया तक लंबा सफर
एशियन कप से पहले भारतीय महिला टीम तुर्किये जाएगी, जहां वह यूरोपीय क्लबों और कुछ राष्ट्रीय टीमों के खिलाफ कई मुकाबले खेलेगी। इस दौरे को तैयारी का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। लगभग एक महीने तक वहां रहने के बाद टीम 10 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया पहुंचेगी। वहां भी स्थानीय टीमों या टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही अन्य राष्ट्रीय टीमों के खिलाफ अभ्यास मैच खेलने की योजना है। 4 मार्च को टूर्नामेंट का पहला मुकाबला खेलने से पहले टीम का पूरा फोकस लय और आत्मविश्वास बनाने पर रहेगा।

घरेलू लीग से मिली नई उम्मीदें
कोच क्रिस्पिन चेत्री ने हाल ही में भारतीय महिला लीग के कई मुकाबले देखे और खिलाड़ियों की प्रगति को करीब से परखा। उन्होंने माना कि शुरुआती मैचों में खिलाड़ियों में जंग लगी दिखी, लेकिन जैसे जैसे लीग आगे बढ़ी, प्रदर्शन में सुधार आया। कुछ नए चेहरों ने खासा प्रभावित किया है, जो निरंतरता और मेहनत के दम पर आगे आए हैं। कोच ने अलग अलग क्लबों के प्रशिक्षकों से भी बातचीत की और खिलाड़ियों को लेकर फीडबैक लिया। उनका मानना है कि घरेलू लीग का होना ही टीम के लिए बड़ा फायदा है, क्योंकि मैच खेलना ही सबसे बड़ा अभ्यास है।

एशिया कप में क्या होगा रास्ता
भारतीय टीम का सामना एशियन कप में जापान, वियतनाम और चीनी ताइपे से होना है। कोच मानते हैं कि जापान बेहद मजबूत टीम है, लेकिन बाकी दोनों मुकाबले जीते जा सकते हैं। उनका जोर संगठन, फिटनेस और सेट पीस पर है, क्योंकि तकनीकी तौर पर मजबूत टीमों के खिलाफ यही हथियार कारगर हो सकते हैं। कोच का साफ कहना है कि अगर टीम ने वही रवैया दिखाया जो क्वालीफायर में दिखाया था, तो नॉकआउट में पहुंचना संभव है। उनका मानना है कि बड़े सपने पहले दिमाग में जन्म लेते हैं, तभी मैदान पर पूरे होते हैं।

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