हॉकी

गांव से ओलिंपिक तक का सफर तय कर संजय कालीरावणा बने भारतीय टीम के कप्तान जानिए उनकी मेहनत और जज्बे की कहानी

डाबड़ा गांव के संजय कालीरावणा ने ओलिंपिक ब्रॉन्ज जीतने के बाद अब भारतीय हॉकी टीम-A के कप्तान का पद संभाला है। बचपन से कठिन मेहनत कर संजय ने गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का प्रेरणादायक सफर तय किया।

हिसार जिले के डाबड़ा गांव के ओलिंपियन संजय कालीरावणा को भारतीय हॉकी टीम-A का कप्तान नियुक्त किया गया है. संजय 12 से 18 अक्टूबर तक चीन के खिलाफ होने वाली श्रृंखला में टीम की अगुवाई करेंगे. टीम में वह डिफेंडर की भूमिका निभाएंगे और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे.

पेरिस ओलिंपिक में योगदान
संजय के कोच राजेंद्र सिहाग ने बताया कि संजय ने देश के लिए पेरिस ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. उनकी कड़ी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.

छोटी उम्र से शुरू हुई यात्रा
संजय ने मात्र 7 वर्ष की आयु में हॉकी स्टिक उठाई थी और गांव के मैदान में अपने सीनियर खिलाड़ियों के साथ नियमित अभ्यास किया. उनके खेल और समर्पण को देखकर कोच राजेंद्र सिहाग ने उनकी मदद की और उन्हें आगे बढ़ाया.

सादगी और मेहनत का प्रतीक
संजय कालीरावणा अपने सादगी भरे स्वभाव और मेहनत के लिए जाने जाते हैं. आज वह न केवल डाबड़ा गांव बल्कि पूरे जिले और हरियाणा के लिए गर्व का विषय बन चुके हैं.

जश्न का माहौल
संजय के कप्तान बनने की खबर से उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है. डाबड़ा गांव समेत पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और लोग उनके नए पद का जश्न मना रहे हैं.

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