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फिर खतरे में भारतीय फुटबॉल टीम का एशियाई खेलों का सपना – क्या इस बार भी मिलेगी अंतिम समय पर राहत?

भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम का एशियाई खेलों में खेलने का सपना फिर संकट में है. खेल मंत्रालय के नए दिशानिर्देशों के तहत टीम पात्र नहीं है. अब फैंस को उम्मीद है कि सरकार अंतिम समय में नियमों में ढील देकर राहत देगी.

भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम के लिए अगले साल होने वाले ऐची-नागोया एशियाई खेलों में भाग लेना एक बार फिर अनिश्चित हो गया है. खेल मंत्रालय ने बुधवार को टीमों और खिलाड़ियों की पात्रता के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं. इन नियमों के मुताबिक केवल वही टीमें और एथलीट इस आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व कर पाएंगे, जिनमें पदक जीतने की क्षमता हो.

कठोर मानदंडों में नहीं फिट बैठी भारतीय टीम
नए नियमों के अनुसार, फुटबॉल जैसी टीम स्पर्धाओं को या तो एशियाई चैम्पियनशिप में शीर्ष आठ में रहना होगा या फिर महाद्वीपीय रैंकिंग में टॉप-8 में होना जरूरी है. फिलहाल भारतीय पुरुष टीम विश्व रैंकिंग में 134वें और एशिया में 24वें स्थान पर है. एशियाई कप में उनका सफर ग्रुप स्टेज तक ही सीमित रहा, जिससे वे इस मानदंड पर खरे नहीं उतरते.

2018 और 2023 का कारण!
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय फुटबॉल टीम ऐसी स्थिति में है. 2018 में उन्हें शीर्ष आठ में न होने के कारण एशियाई खेलों से बाहर कर दिया गया था. 2023 हांग्जो एशियाड में भी शुरुआत में मंजूरी नहीं मिली थी, लेकिन अंतिम समय पर नियमों में ढील देकर उन्हें खेलने का मौका दिया गया. इस बार भी फैंस को सरकार से उसी तरह के राहत भरे फैसले की उम्मीद है.

महिला टीम को भी करनी होगी कड़ी मेहनत
महिला फुटबॉल टीम महाद्वीपीय रैंकिंग में 12वें स्थान पर है, लेकिन वह भी पात्रता मानदंड को पूरा नहीं करती. हालांकि मार्च 2026 में होने वाले एशियाई कप में अच्छा प्रदर्शन करके वे रैंकिंग में सुधार कर सकती हैं और अपने लिए राह आसान बना सकती हैं.

उम्मीद की एक किरण – ‘छूट वाला खंड’
खेल मंत्रालय के दिशानिर्देशों के नियम 5 में कहा गया है कि यदि विशेषज्ञों और SAI की राय में टीम की भागीदारी जरूरी समझी जाए तो मानदंडों में छूट देकर अनुमति दी जा सकती है. यही खंड भारतीय पुरुष टीम के लिए एकमात्र सहारा है. अब निगाहें मंत्रालय के अगले फैसले पर हैं – क्या इस बार भी उन्हें अंतिम समय में हरी झंडी मिलेगी?

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