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धूल भरे मैदान से IWL तक का सफर, ड्राइवर की बेटी खुशी गहलोत अब बड़े मंच पर खेलने को तैयार

रायसेन की खुशी गहलोत ने आर्थिक तंगी के बावजूद मेहनत से इंडियन वुमेंस लीग तक का सफर तय किया। ड्राइवर की बेटी अब डीएफए रायसेन का प्रतिनिधित्व करेंगी और बड़े मंच पर अपने संघर्ष की कहानी लिखने को तैयार हैं।

मध्य प्रदेश के रायसेन की रहने वाली 21 साल की खुशी गहलोत की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। साधारण परिवार से आने वाली खुशी अब इंडियन वुमेंस लीग में खेलने जा रही हैं। उनके पिता ड्राइवर हैं और दिनभर मेहनत करके घर चलाते हैं। घर की आर्थिक हालत ज्यादा मजबूत नहीं थी। ऐसे में फुटबॉल जैसे खेल का सपना देखना आसान नहीं था, क्योंकि इसमें अच्छे जूते, किट और सही खानपान की जरूरत होती है। लेकिन खुशी ने हार नहीं मानी।

जब जूते खरीदने के लिए की नौकरी
खुशी ने स्कूल के दिनों में फुटबॉल खेलना शुरू किया। शुरुआत में उनके पास स्पाइक्स जूते तक नहीं थे। परिवार भी ज्यादा मदद नहीं कर पा रहा था। ऐसे में उन्होंने खुद कमाने का फैसला किया। करीब डेढ़ साल तक उन्होंने छोटी नौकरी की। दिन में काम और रात में अभ्यास उनका रोज का रूटीन बन गया। अपनी कमाई से उन्होंने जूते खरीदे और ट्रेनिंग का खर्च उठाया।

परिवार और शहर के लिए खेलती हैं
खुशी कहती हैं कि मैदान पर किया गया हर गोल उनके परिवार और रायसेन शहर के नाम होता है। वह मानती हैं कि उनके संघर्ष में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत रहा। भले ही साधन कम थे, लेकिन हौसला कभी कम नहीं हुआ। यही जिद उन्हें आगे बढ़ाती रही।

संघर्ष अभी भी जारी है
सीनियर नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी के लिए खुशी ने नौकरी छोड़ दी, ताकि पूरा ध्यान खेल पर दे सकें। आर्थिक मुश्किलें आज भी हैं। वह महंगे जूते या सुविधाएं नहीं ले पातीं, लेकिन उनका आत्मविश्वास मजबूत है। उनका मानना है कि मेहनत और लगन से हर कमी पूरी की जा सकती है।

मैदान पर तेज और मजबूत खिलाड़ी
खुशी सेंट्रल मिडफील्डर की भूमिका निभाती हैं। उनकी रफ्तार और स्टैमिना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। लोकल टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन को देखकर उन्हें रीजनल टीम में मौका मिला। वहां से उन्होंने लगातार अच्छा खेल दिखाया और पहचान बनाई।

अब IWL में दिखेगा जलवा
अब खुशी गहलोत अपनी टीम डीएफए रायसेन का प्रतिनिधित्व करेंगी, जिसने पहली बार इंडियन वुमेंस लीग के लिए क्वालिफाई किया है। छोटे शहर की इस खिलाड़ी का सपना अब बड़े मंच पर सच होने जा रहा है। उनका सफर बताता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात रास्ता नहीं रोक सकते।

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