
मणिपुर में शांति की उम्मीद क्या लौट आई? दो खिलाड़ियों ने 3,000 किमी दूर इतिहास रच दिया !
भारत ने ईरान को 2-1 से हराकर AFC U-17 एशियन कप के लिए क्वालीफाई किया। मणिपुर के दो खिलाड़ियों के गोल ने न सिर्फ जीत दिलाई, बल्कि संघर्ष से जूझ रहे राज्य में खेल के जरिए एकता और उम्मीद की नई किरण जगाई।
भारत की अंडर-17 फुटबॉल टीम ने ईरान को 2-1 से हराकर AFC U-17 एशियन कप 2026 के लिए क्वालीफाई कर लिया. लेकिन इस जीत की असली कहानी इन दो गोलों में छिपी है, जिन्हें मणिपुर के दो समुदायों कुकी और मैतेई के खिलाड़ियों ने मिलकर किया. पहले हाफ में डलालमुोन गंते ने पेनल्टी से बराबरी का गोल दागा और दूसरे हाफ में गुनलेइबा वांगखेइराक्पम ने काउंटर-attack पर भारत के लिए विजयी गोल किया. दो साल से संघर्ष झेल रहे मणिपुर के लोग, जो सोशल मीडिया पर अभी भी बंटे हुए हैं, उन्होंने अपने-अपने समुदाय के खिलाड़ियों की सराहना की. लेकिन फुटबॉल मैदान पर उन्होंने यह जीत भारत के लिए मिलकर हासिल की.
मणिपुर के कैंपों में फुटबॉल ने जिंदा रखी उम्मीद
मणिपुर में मई 2023 से चली आ रही हिंसा में 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए और 250 से ज्यादा जानें गईं. आज भी 58,000 से ज्यादा लोग 351 राहत कैंपों में रह रहे हैं. लेकिन इन कैंपों में एक चीज़ नहीं रुकी फुटबॉल. बच्चे नंगे पांव भी हों, खेलना नहीं छोड़ते. जिन मैदानों पर एक साल तक सन्नाटा था, वहां अब फिर से मैच होने लगे हैं. दोनों समुदायों के खिलाड़ी अगस्त से गोवा में राष्ट्रीय कैंप में साथ अभ्यास कर रहे हैं. संघर्षग्रस्त राज्य में जहां सामान्य जिंदगी वापस लाना अभी भी चुनौती है, वहीं फुटबॉल ने लोगों को फिर से एकजुट होने की छोटी सी उम्मीद दिखाई है.
फुटबॉल ने किया वो, जो राजनीति नहीं कर सकी
मणिपुर में आज भी एक अदृश्य लाइन राज्य को दो हिस्सों में बांटे हुए है. कुकी और मैतेई सुरक्षित क्षेत्रों से बाहर नहीं जा सकते. लोगों को छोटी दूरी का सफर भी 10 घंटे के चक्कर से करना पड़ता है. राष्ट्रपति शासन फरवरी 2025 से लागू है, लेकिन 3,000 से ज्यादा हथियार अब भी बरामद नहीं हुए. राहत कैंपों में लोग टारपोलिन के तम्बुओं में रहते हैं, पानी की कमी है, बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं और कई मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं. इन हालात में, फुटबॉल मैदान पर दो समुदायों के खिलाड़ियों का साथ आना यह दिखाता है कि खेल वहां उम्मीद दे रहा है, जहां शासन और सुरक्षा व्यवस्था विफल रही.
शांति की ओर एक छोटा लेकिन जरूरी कदम
AFC क्वालिफायर में मिली यह जीत भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पिछले 20 वर्षों में यह केवल तीसरी बार है जब टीम ने क्वालीफाई किया है. मणिपुर के सात मैतेई और दो कुकी खिलाड़ियों से बनी यह टीम दिखाती है कि राज्य की असल ताकत उसकी प्रतिभा और एकता में है. 3,000 किलोमीटर दूर अहमदाबाद में हुई यह जीत सिर्फ एक फुटबॉल मैच नहीं, बल्कि एक संकेत है कि मणिपुर में शांति अभी भी संभव है. मैदान पर जिस तरह एक पास और एक फिनिश ने भारत को जीत दिलाई, शायद वैसी ही साझेदारी राज्य को भी फिर से जोड़ सकती है.
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