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एशिया से बाहर मोहन बागान, एएफसी का फैसला बना भारतीय फुटबॉल का बड़ा झटका, जानिए कैसे ?

AFC ने मोहन बागान पर एक सीजन का महाद्वीपीय बैन और भारी जुर्माना लगाया, क्योंकि क्लब ने ईरान में मैच खेलने से इनकार किया था। फैसला भारतीय फुटबॉल के लिए बड़ा झटका है और घरेलू संकट को और गहरा कर रहा है।

भारतीय फुटबॉल के लिए मुश्किल दौर के बीच एशियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (AFC) ने मोहन बागान सुपर जायंट को बड़ा झटका दिया है। एएफसी ने क्लब पर एक सीजन का कॉन्टिनेंटल बैन लगाया है और कुल 1 लाख डॉलर से ज्यादा का जुर्माना ठोका है। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि मोहन बागान ने 2025-26 एएफसी चैंपियंस लीग टू से खुद को बाहर कर लिया था। क्लब ने ईरान में सेपाहान एससी के खिलाफ ग्रुप मैच खेलने से इनकार कर दिया था, जिसे एएफसी ने नियमों का उल्लंघन माना।

जुर्माना, मुआवजा और सब्सिडी खत्म
एएफसी की डिसिप्लिनरी कमेटी ने मोहन बागान पर 50 हजार डॉलर का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा एएफसी और सेपाहान क्लब को नुकसान की भरपाई के लिए 50,729 डॉलर देने का आदेश दिया गया है। इतना ही नहीं, क्लब को 2027-28 सीजन तक किसी भी एएफसी क्लब टूर्नामेंट में खेलने से रोक दिया गया है। 2025-26 सीजन के लिए मिलने वाली सभी सब्सिडी, बोनस और ट्रैवल फंड भी रद्द कर दिए गए हैं। अगर कोई रकम पहले मिल चुकी है तो उसे 30 दिन के भीतर लौटाना होगा।

मोहन बागान का पक्ष और CAS की उम्मीद
मोहन बागान ने इस फैसले को पक्षपातपूर्ण बताया है। क्लब अधिकारियों के मुताबिक मामला अभी कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स में लंबित है और वहां से राहत की उम्मीद है। क्लब का कहना है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने ईरान यात्रा से इनकार किया था, क्योंकि छह विदेशी खिलाड़ियों ने अपने देशों की एडवाइजरी के चलते जाने से मना कर दिया था। इससे पहले भी पिछले सीजन में मोहन बागान ईरान नहीं गया था, लेकिन तब कोई सजा नहीं मिली थी।

भारतीय फुटबॉल पर गहराता संकट
एएफसी की यह सख्ती ऐसे वक्त में आई है, जब भारतीय फुटबॉल पहले से ही प्रशासनिक संकट में है। इंडियन सुपर लीग, आई-लीग और आई-लीग 2 के भविष्य पर अब भी असमंजस बना हुआ है। एआईएफएफ और एफएसडीएल के बीच 15 साल का करार खत्म हो चुका है और नया समझौता नहीं हुआ है। हालात इतने गंभीर हैं कि 1996 के बाद पहली बार भारत में पुरुषों की घरेलू लीग सीजन रद्द होने का खतरा है। हालात संभालने के लिए खेल मंत्रालय को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा है, ताकि भारतीय फुटबॉल को और बड़ा नुकसान न हो।

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