
राजगीर खेल अकादमी को मिली एशियाई हॉकी महासंघ की मान्यता, इंटरनेशनल फेडरेशन का मिला समर्थन
राजगीर खेल अकादमी को एशियाई हॉकी महासंघ की मान्यता मिली। FIH ने भी समर्थन किया। गोष्ठी में महिला हॉकी, ग्रासरूट विकास और राज्य सरकार की पहल पर चर्चा हुई। राजगीर अब एशिया में हॉकी का प्रमुख केंद्र बन रहा है।
बिहार के खेल इतिहास में बड़ा मील का पत्थर जुड़ गया है। राजगीर खेल अकादमी को एशियाई हॉकी महासंघ (Asian Hockey Federation) की आधिकारिक मान्यता मिलने जा रही है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) ने भी इस पहल का समर्थन किया है। शुक्रवार को राजगीर खेल अकादमी के हॉल में आयोजित विचार गोष्ठी ‘ग्रासरूट टू ग्लोरी–ऑल अबाउट हॉकी’ में इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. तैयब एकराम ने यह घोषणा की।
बिहार और देश में हॉकी के विकास के लिए आयोजित इस विचार गोष्ठी में महिला हॉकी के विकास, हॉकी में खेल विज्ञान और तकनीकी का महत्व, प्रशिक्षण और प्रशिक्षकों की महत्ता, बुनियादी स्तर पर एक सुदृढ़ पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण, हॉकी के पुनरुद्धार में राज्य और केंद्र सरकार की भूमिका आदि महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों द्वारा उपयोगी विचार और सुझाव सामने रखा गया।
भारत में यूरोपीय प्रशिक्षकों का सवाल
गोष्ठी के दौरान शंकरण ने डॉ. तैयब से पूछा कि भारत में हॉकी प्रशिक्षक ज्यादातर यूरोप से क्यों आते हैं। इस पर डॉ. तैयब ने साफ कहा कि एशिया में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें पहचानने और सही आर्थिक एवं तकनीकी सुविधाएं देने की आवश्यकता है। तभी एशियाई प्रशिक्षक विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना पाएंगे।
विश्व की सबसे बड़ी प्रतिभा खोज प्रतियोगिता का जिक्र
रवींद्रण शंकरण ने बुनियादी स्तर पर बिहार में आयोजित हो रही विश्व की सबसे बड़ी खेल प्रतिभा खोज प्रतियोगिता मशाल का जिक्र करते हुए डॉ. तैयब से पूछा कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ प्रतिभा खोज के लिए क्या कर रही है? इस पर डॉ. तैयब ने कहा कि ग्रासरूट टू ग्लोरी का विचार तो ठीक है मगर टॉप लेवल से नीचे तक भी सोच, व्यवहार और खेल दर्शन में बदलाव लाने की जरूरत है तभी सही प्रतिभा निकल कर सामने आ सकेगी।
महिला हॉकी और ग्रासरूट पर फोकस
कार्यक्रम में भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व खिलाड़ी प्रीतम रानी ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगन से कोई भी खिलाड़ी अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है। वहीं हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने कहा कि किसी भी इंटरनेशनल टूर्नामेंट में इस तरह का कॉनक्लेव पहली बार आयोजित हुआ है, जो निश्चित रूप से खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है।
राज्य सरकार की ‘प्रेरणा योजना’ के तहत युवा खिलाड़ियों को 3 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है, जिससे वे बेहतर किट, पोषण और प्रशिक्षण का लाभ उठा सकें। रवींद्रण शंकरण ने कहा कि हीरो एशिया कप 2025 में हमारे कई बच्चे बॉल बॉय और बॉल गर्ल की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन्हीं में से कोई भविष्य में भारत का कप्तान बन सकता है।
राजगीर बना हॉकी का केंद्र
बता दें कि अभी 29 अगस्त से 7 सितंबर तक राजगीर खेल परिसर में बिहार में पहली बार हीरो एशिया कप 2025 आयोजित की जा रही है। शुक्रवार को अवकाश होने के कारण कोई मैच नहीं होना था इसलिए इस विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया था। विशेषज्ञों की राय और अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ के समर्थन से यह साफ है कि राजगीर अब केवल बिहार ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में हॉकी का एक मजबूत केंद्र बनने जा रहा है।
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