
फुटबॉल से एथलेटिक्स तक: अनिमेष कुजूर का भरोसे और मेहनत से भरा सफर
अनिमेष कुजूर ने फुटबॉल से एथलेटिक्स की ओर रुख कर शानदार सफर तय किया। कोच मार्टिन ओवेंस की ट्रेनिंग और पारिवारिक समर्थन से उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। अब उनका लक्ष्य ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में इतिहास रचना है।
कॉन्टिनेंटल टूर की गहमागहमी खत्म होने के बाद सबसे तेज भारतीय धावक अनिमेष कुजूर ओडिशा के कलिंगा स्टेडियम के ट्रैक पर अपने कोच मार्टिन ओवेंस के साथ सुकून से बैठे हुए थे. इस मौके पर उन्होंने बीते लंबे और थकाऊ सीजन पर खुलकर चर्चा की.
उसेन बोल्ट की तरह पोज देकर मनाया जश्न
साल की शुरुआत में उन्होंने कई घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लिया, फिर यूरोप में ट्रेनिंग और रेस, और उसके बाद घर लौटकर कॉन्टिनेंटल टूर में हिस्सा लिया. इस दौड़ से ठीक पहले वे सर्दी से जूझ रहे थे और दवा लेकर मैदान में उतरे. घरेलू दर्शकों के उत्साह ने पहले उन्हें दबाव में डाला, लेकिन 200 मीटर फाइनल में 20.77 सेकंड में जीतकर उन्होंने यही भीड़ अपनी ताकत में बदल दी. परिवार पहली बार उन्हें दौड़ते देखने आया था, और उस पल का जश्न उन्होंने उसेन बोल्ट की तरह पोज देकर मनाया.
घरेलू दर्शकों के दबाव को संभालना सीखा
हालांकि अनिमेष मानते हैं कि उनकी टाइमिंग उतनी अच्छी नहीं थी. कोचिंग और अभ्यास के चलते उनका शरीर पहले 300 मीटर की पीक स्पीड के लिए तैयार रहता था, लेकिन सीजन आगे बढ़ने के साथ यह दूरी घट जाती है. इस प्रतियोगिता से उन्होंने सीखा कि घरेलू दर्शकों के दबाव को कैसे संभालना है. इससे पहले यूरोप में उन्होंने प्रोफेशनल एथलीट्स से पेशेवर रवैया अपनाना सीखा.
अनिमेष का पहला प्यार फुटबॉल
अनिमेष के शांत स्वभाव के पीछे बचपन की कहानी है. उन्हें पांच साल की उम्र में फुटबॉल थमा दिया गया था, लेकिन सैनिक स्कूल में पढ़ाई के लिए 600 किलोमीटर दूर भेज दिया गया. वहां परिवार से दूर रहना और सीमित संपर्क ने उन्हें भीतर से चुपचाप बना दिया. फुटबॉल उनका पहला प्यार था, लेकिन एक स्थानीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में संयोग से 5 गोल्ड मेडल जीतकर वे सुर्खियों में आ गए.
पिता और मौसा ने जताया अनिमेष पर भरोसा
कॉलेज के दौरान उन्होंने महसूस किया कि सरकारी नौकरी उनकी मंजिल नहीं है. मौसा की मदद से पिता को यह बताया, और हैरानी की बात यह रही कि पिता ने तुरंत उनका समर्थन किया. मां और मौसी शुरू में खिलाफ थीं, लेकिन पिता और मौसा का भरोसा आज भी उनका हौसला बढ़ाता है.
मार्टिन ओवेंस की कोचिंग से करियर को मिली नई ऊंचाई
मार्टिन ओवेंस की कोचिंग से उनका करियर नई ऊंचाई पर पहुंचा. शुरुआत में उन्हें स्क्वॉट तक करना नहीं आता था और तैरना भी नहीं आता था, लेकिन आज वे अनुशासित, संवेदनशील और केंद्रित एथलीट हैं. 100 मीटर में उनका सर्वश्रेष्ठ समय 10.18 सेकंड है, जो बेहतर उपकरण होने पर 10.08 हो सकता था. यूरोप के डायमंड लीग में U-23 कैटेगरी में 200 मीटर दौड़ने वाले वे पहले भारतीय हैं.
हफ्ते में 5 दिन ट्रेनिंग करते हैं अनिमेष
वे हफ्ते में पांच दिन ट्रेनिंग करते हैं- सुबह ट्रैक वर्क, फिर जिम या पूल सेशन, दोपहर में आराम और शाम को अभ्यास. रात 9 बजे के बाद फोन नहीं और जल्दी सोना उनका नियम है. अब उनका लक्ष्य टोक्यो वर्ल्ड चैम्पियनशिप 2025, एशियाई खेल 2026, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 और लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 तक लगातार बेहतर प्रदर्शन करना है.
फुटबॉल के मैदान से एथलेटिक्स ट्रैक तक का उनका यह सफर भरोसे, मेहनत और शांत दृढ़ता का प्रतीक है. दिशा तय है, मेहनत जारी है, और मंजिल है- दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच.
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