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झारखंड की बेटी अनुष्का बनी भारत की शान: संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी

भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम में इस बार झारखंड की धमक पूरे देश में सुनाई दे रही है. रांची की दिव्यानी लिंडा, गुमला की अनिता, सूरजमुनी कुमारी, एलिजाबेथ और रांची की अनुष्का कुमारी का चयन इस टीम में हुआ है. यह उपलब्धि न केवल राज्य के लिए गर्व की बात है, बल्कि इन बेटियों के संघर्ष की भी मिसाल है.

संघर्षों से निकली चमकती किरण – अनुष्का कुमारी
ओरमांझी गांव की अनुष्का कुमारी हजारीबाग के आवासीय बालिका खेल छात्रावास में रहकर फुटबॉल की कड़ी ट्रेनिंग ले रही हैं. दिन में 7 घंटे से अधिक प्रैक्टिस करती हैं. उनके पिता कभी फुटबॉल खिलाड़ी थे, लेकिन तीन साल पहले एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए. अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी मजदूरी कर रही मां रीता मुंडा के कंधों पर है.

पिता का सपना, बेटी का संकल्प
अनुष्का के लिए फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि पिता का अधूरा सपना पूरा करने का जरिया है. जब भारतीय टीम में चयन की खबर मिली, तो उन्होंने सबसे पहले अपने पिता को बताया. दोनों की आंखों में खुशी के आंसू थे. अनुष्का कहती हैं कि मन में जुनून था, पहचान बनानी थी — और अब पहला कदम उन्होंने पार कर लिया है.

सेलेक्शन में दिखाया आत्मविश्वास और कौशल
चयन प्रक्रिया के दौरान अनुष्का ने 50 से अधिक खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन किया. झारखंड से 9 खिलाड़ी पहुंचे थे, जिनमें से 5 का चयन हुआ. वह ऑलराउंडर भूमिका में खेलती हैं, जरूरत पड़ने पर स्ट्राइकर भी बन जाती हैं. उनका आदर्श खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो है.

कोच की आंखों का तारा
अनुष्का की कोच सुशीला कुमारी बताती हैं कि वह बेहद अनुशासित और मेहनती खिलाड़ी हैं. जो सिखाया जाता है, तुरंत सीखती हैं और लागू भी करती हैं. सुशीला को भरोसा है कि आने वाले समय में अनुष्का भारतीय फुटबॉल की नई पहचान बनेंगी.

सपनों की उड़ान जारी है
संत कोलंबस कॉलेजिएट स्कूल, हजारीबाग की नौवीं की छात्रा अनुष्का अब सिर्फ अपने परिवार की उम्मीद नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की प्रेरणा बन चुकी हैं. उनका अगला लक्ष्य – भारतीय टीम की कप्तानी.