
भारतीय फुटबॉल में नया इतिहास, पहली ट्रांसजेंडर लीग ने खोला नया रास्ता, पूरा देश हुआ हैरान
भारतीय फुटबॉल में पहली ट्रांसजेंडर लीग की शुरुआत जमशेदपुर सुपर लीग में हुई। 7 टीमों और 70 खिलाड़ियों की भागीदारी ने समावेशिता का नया अध्याय खोला। यह पहल खेल में समान अवसर और पहचान का मजबूत संदेश देती है।
भारतीय फुटबॉल ने पहली बार एक ऐसा पल देखा, जिसे ऐतिहासिक कहा जा सकता है। जमशेदपुर सुपर लीग (JSL) के तहत पहली ट्रांसजेंडर फुटबॉल लीग की शुरुआत हुई, जिसमें एक नहीं बल्कि 7 टीमें मैदान पर उतरीं। ये टीम थीं जमशेदपुर FT, चाईबासा FC, चक्रधरपुर FC, इंद्रानगर FC, नोमंडी FC, सरायकेला FC और कोल्हान टाइगर FC। पांच-ए-साइड फॉर्मेट में आयोजित इस लीग की शुरुआत पहले चार टीमों से करनी थी, लेकिन बढ़ते रजिस्ट्रेशन और उत्साह के चलते तीन और टीमें जोड़नी पड़ीं। यह साफ दिखाता है कि फुटबॉल के इस नए मंच का कितना लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था।
खिलाड़ियों की भावनाएं छलकीं
पहले ही दिन मुकाबले रोमांच से भरे रहे। जमशेदपुर FT ने चाईबासा FC को 7-0 से हराकर दमदार शुरुआत की, जबकि कोल्हान टाइगर FC ने चक्रधरपुर FC को 3-0 से मात दी। इंद्रानगर FC और नोमंडी FC के बीच मैच गोलरहित रहा। जमशेदपुर FT की खिलाड़ी पूजा सोय, जिन्होंने शुरुआती मुकाबले में 4 गोल किए, भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि मैदान पर उनकी पहचान सिर्फ खेल से है, न कि जेंडर से। दूसरी खिलाड़ी आलिया ने बताया कि इतने प्रोफेशनल माहौल में खेलना पहली बार हो रहा है और यह अनुभव बेहद प्रेरक है।
खिलाड़ियों के लिए सिर्फ फुटबॉल नहीं
जमशेदपुर FT की कप्तान प्यारी हेस्सा ने इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पल बताया। उन्होंने कहा कि भारत की पहली ट्रांसजेंडर लीग का हिस्सा बनना गर्व की बात है और यह कदम अन्य राज्यों को भी प्रेरित करेगा। आयोजकों के अनुसार, यह लीग सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक संदेश है कि खेल हर किसी का है चाहे उनकी पहचान कोई भी हो। JSL के ग्रासरूट प्रमुख कुंदन चंद्रा ने कहा कि फुटबॉल सभी के लिए है और क्लब की कोशिश है कि प्रतिभा को बिना भेदभाव के आगे बढ़ाया जाए।
42 मैचों में दिखेगी नई कहानी
इस लीग में 70 खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें टाटा स्टील कर्मचारी, दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यवसाय करने वाले लोग भी हैं। हर टीम 12 मैच खेलेगी और कुल 42 मुकाबले आयोजित होंगे। JSL को हाल ही में AIFF की ब्लू कबस लीग से रीब्रांड किया गया है और अब यह छह महीने लंबा फुटबॉल उत्सव बन चुका है। पहली ट्रांसजेंडर लीग को इसमें शामिल करना भारतीय खेल संस्कृति में समावेशिता का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
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