कबड्डी

गंभीर का वादा टूटा या टीम की मजबूरी? सैमसन फिर बाहर… गिल की एंट्री से बदला पूरा समीकरण, क्या बर्बाद हो जाएगा करियर ?

संजू सैमसन लगातार चौथे T20 में बाहर हैं, जबकि शुभमन गिल को मौका मिल रहा है। गौतम गंभीर के पुराने वादे और मौजूदा टीम चयन पर सवाल उठे हैं। वर्ल्ड कप से पहले रोल बदलने से सैमसन के करियर पर संकट गहराता दिख रहा है।

संजू सैमसन और गौतम गंभीर की वह पुरानी बातचीत, जिसमें गंभीर ने कहा था कि 21 बार शून्य पर आउट होने के बाद भी वे सैमसन को नहीं हटाएंगे, आज फिर चर्चा में है। वजह है कि वही सैमसन लगातार चार टी20 मैचों से बाहर बैठे हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरे के आखिरी तीन मैच और अब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहला मैच कहीं भी उन्हें जगह नहीं मिली। यह चौंकाने वाली स्थिति इसलिए भी है क्योंकि पिछले एक साल में ओपनर के रूप में सैमसन टीम इंडिया का सबसे विस्फोटक विकल्प बन चुके थे। लेकिन अचानक टीम संयोजन बदला और सैमसन प्लान में पीछे धकेल दिए गए।

गिल की वापसी बनी टीम की सबसे बड़ी उलझन
टीम इंडिया की मौजूदा पहेली शुभमन गिल की वापसी से शुरू हुई। भारत के उपकप्तान बनाए जा चुके गिल को प्लेइंग-11 में बनाए रखना टीम मैनेजमेंट की प्राथमिकता बन गया। लेकिन गिल की बल्लेबाजी का टेंपो और स्ट्राइक रेट भारत के आक्रामक टी20 मॉडल से मेल नहीं खा रहा। दूसरी तरफ सैमसन और अभिषेक की जोड़ी भारत को 200+ के स्कोर तक नियमित पहुंचाती रही है। लेकिन गिल के लौटते ही सैमसन को मिडिल ऑर्डर में धकेला गया, जहां उनका रिकॉर्ड उतना मजबूत नहीं है।

नंबर बदलते गए, रोल छीना गया और प्रदर्शन पर असर दिखा
अक्टूबर 2024 से जून 2025 तक सैमसन ने बतौर ओपनर 12 इनिंग में 417 रन ठोके, स्ट्राइक रेट 183 से ऊपर। यह आंकड़े उन्हें दुनिया के टॉप टी20 ओपनरों में रखते हैं। इसके बाद भी उन्हें कभी मिडिल ऑर्डर, कभी फिनिशर बनाकर भेजा गया, जो उनकी नैचुरल भूमिका नहीं है। वहीं गिल की वापसी के बाद ओपनिंग में उनका औसत गिरा और रन भी कम हुए। टीम संतुलन बनाए रखने के प्रयास में मैनेजमेंट लगातार प्रयोग करता रहा, लेकिन इन प्रयोगों का सबसे बड़ा नुकसान सैमसन को झेलना पड़ा। यही वजह है कि गंभीर का भरोसा अब टीम चयन में दिखाई नहीं दे रहा।

वर्ल्ड कप की उलटी गिनती-किसका होगा मौका?
भारत अगले साल टी20 विश्व कप में डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में उतरेगा। इसलिए सवाल बड़ा है पावरप्ले में निडर और तेज शुरुआत कौन देगा? गिल, जिनके स्ट्राइक रेट पर सवाल हैं, या सैमसन, जिन्होंने पिछले साल तीन शतक झटके और भारत की सबसे तेज शुरुआतों के सूत्रधार बने। सैमसन स्क्वॉड में जरूर हैं, लेकिन प्लेइंग-11 में जगह की कोई गारंटी नहीं। क्या भारत फिर 2022 जैसी गलती दोहराने जा रहा है, जब धीमे टॉप ऑर्डर ने टीम को पीछे कर दिया था? क्या इस विश्व कप में गिल का भरोसा भारी पड़ेगा या सैमसन की धमाकेदार शुरुआतों की जरूरत होगी अब यही सबसे बड़ा सवाल है।

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